
Bhopal 6-month old Kashi - Patrikia.com
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-1 जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही इंदौर की कनिका शर्मा के इलाज की उम्मीद मजबूत हुई है, जबकि भोपाल की छह माह की काशी अब भी मदद का इंतजार कर रही है। एक ही बीमारी, एक जैसी उम्र और जिंदगी बचाने की एक जैसी जंग। फिर भी दोनों बच्चियों की कहानी अलग-अलग दिशा में बढ़ रही है। कनिका के लिए समाज और संस्थाओं ने मिलकर 8.23 करोड़ रुपए से अधिक जुटा लिए हैं, लेकिन काशी के उपचार के लिए अब तक एक करोड़ रुपए भी एकत्र नहीं हो सके हैं। उसकी जिंदगी बचाने के लिए मां पिता कड़ी जद्दोजहद कर रहे हैं। काशी के पिता डॉ. रोहित दुबेपुरिया और मां प्रकृति सिसोदिया को बेटी के इलाज के लिए समाज की आर्थिक सहायता की दरकार है। उनका कहना है कि समाज मदद कर दे तो उनकी बेटी की जिंदगी भी बचाई जा सकती है। इधर अपनी दुर्लभ बीमारी से अनभिज्ञ मासूम काशी उनकी गोद में पड़ी मुस्कुराती रहती है।
यह है बीमारी, इसके लिए लगने वाला इंजेक्शन दुनिया के सबसे महंगे उपचारों में
विशेषज्ञों के अनुसार स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-1 एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। इसका प्रभावी इलाज जीन थेरेपी है। इसके लिए लगने वाला इंजेक्शन दुनिया के सबसे महंगे उपचारों में शामिल है और इसकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपए है।
कनिका के माता-पिता ने क्राउडफंडिंग अभियान शुरू किया था। इसमें इंदौर सहित देशभर से लोगों ने सहयोग दिया। कई सामाजिक संगठनों और दानदाताओं ने भी आर्थिक मदद की। इसके चलते 15 करोड़ रुपए कीमत वाले जीवनरक्षक इंजेक्शन के लिए बड़ी राशि जुटाने में सफलता मिली है और उसके इलाज की उम्मीद बढ़ गई है।
भोपाल की काशी भी कनिका जैसी बीमारी से लड़ रही है। उसके माता- पिता लगातार समाज से मदद की अपील कर रहे हैं। चैरिटी कार्यक्रमों और जनसहयोग से राशि जुटाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन लक्ष्य अभी काफी दूर है। समय बीतने के साथ परिवार की चिंता भी बढ़ रही है।
एम्स भोपाल में कार्यरत काशी के पिता डॉ. रोहित दुबेपुरिया और मां प्रकृति सिसोदिया का कहना है कि यदि समाज साथ खड़ा हो जाए तो उनकी बेटी की जिंदगी भी बचाई जा सकती है। उनके अनुसार छोटे-छोटे सहयोग भी काशी के लिए नई उम्मीद बन सकते हैं।
Updated on:
20 Jun 2026 08:01 am
Published on:
20 Jun 2026 08:01 am
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