
ATS Caught Pakistani Handler: डिजिटल फुटप्रिंट तैयार (Photo Source - Patrika)
ATS Caught Pakistani Handler: एमपी के भोपाल शहर में पाकिस्तानी हैंडलरों के इशारे पर भारत में आतंक का नेटवर्क फैलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने के बाद एटीएस का एक्शन जारी है। राजधानी के काजी कैंप से मोहम्मद फराज की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के अब तक 6 सदस्य एटीएस की टीम गिरफ्तार कर चुकी है।
यह गिरफ्तारियां यूपी, राजस्थान, हरियाणा सहित कुल 5 प्रदेशों में की हैं। जिसमें सबसे बड़ा सरगना बिहार के मधुबनी जिले से इजहार उल हक पकड़ा है। जिससे एटीएस की टीम ने पूछताछ की है। जिस आधार पर करीब आधा दर्जन संदिग्धों की सूची तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक मामले में एनआईए ने भी एटीएस की टीम से पूरे मामले की जानकारी ली है।
एटीएस की टीम अब तक गिरफ्तार किए गए 6 आरोपियों की एक्टिव और पैसिव दोनों डिजिटल फुटप्रिंट तैयार कर रही है। जिसमें ब्राउजिंग हिस्ट्री, लोकेशन डेटा, आईपी एड्रेस, कुकीज और ट्रैकिंग डेटा के साथ ही एप के उपयोग का रिकॉर्ड निकाला जा रहा है। इसके साथ ही सभी के परिवार का बैकग्राउंड निकाला जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक एटीएस की टीम सहारनपुर से गिरफ्तार नईम अबदुल्ला को पकडऩे के बाद दोबारा देवबंद लेकर गई थी। जहां उसके परिजनों सहित अन्य संदिग्ध चीजों की तलाशी ली गई थी।
-सीमी का भी गढ़ रहा है मध्य प्रदेश
-जांच एजेंसियों की वजह से पकड़े जाते हैं आरोपी
-भोपाल में आतंकी संगठन तैयार कर रहे स्लिपर सेल
-पहले भी यहां से संदिग्ध आतंकियों की हुई है गिरफ्तार
इस मामले में राजस्थान के अलवर निवासी 35 वर्षीय मोहम्मद शाकिर मेव को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार वह भी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था और कथित तौर पर देश में कहीं भी ‘लोन वुल्फ’ हमला करने की मानसिकता रखता था। फिलहाल वह 20 जून तक एटीएस हिरासत में है।
एटीएस की जानकारी के मुताबिक फराज और नईम अब्दुल्ला साल 2047 तक देश में शरिया कानून लागू करने की विचारधारा से प्रभावित थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कुछ कट्टरपंथी संगठन यह प्रचार करते हैं कि आजादी के बाद से विभिन्न सरकारों द्वारा एक विशेष समुदाय के साथ अन्याय किया गया है।
जांच एजेंसियां इन दावों और आरोपियों के नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं। फराज का मोबाइल भी ले लिया गया है। इसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि मोबाइल डेटा से फराज के संपर्कों, गतिविधियों और कथित फंडिंग नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।
Published on:
19 Jun 2026 04:21 pm
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