घटना स्थल से महज आधा किमी दूर बागसेवनिया पुलिस को भनक तक नहीं लगी
भोपाल। शिक्षा विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर की बागसेवनिया कलारी के पास कार में संदिग्ध अवस्था में लाश मिली। वे घर से शादी में जाने के लिए निकले थे। ज्वाइंट डायरेक्टर की लाश कार में करीब १६ घंटे तक पड़ी रही, लेकिन घटना स्थल से महज आधा किमी दूर बागसेवनिया पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
रुचि लाइफस्केप निवासी सुरेंद्र कुमार छारी (५५) वल्लभ भवन में ज्वाइंट डायरेक्टर थे। सोमवार सुबह घर शादी में जाने का बोलकर निकले थे। उसके बाद उन्होंने किसी का फोन नहीं उठाया। सोमवार सुबह करीब १०.४५ बजे बागसेवनिया थाने से महज आधा किलोमीटर दूर स्थित कलारी के सामने लोगों ने काफी देर से खड़ी कार देखी, तो पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि कार पर मप्र शासन लिखा हुआ है। तलाशी ली तो मोबाइल मिला, जिससे संपर्क किया तो सुरेंद्र कुमार के रूप में पहचान हुई। एफएसएल टीम भी मौके की जांच की और बॉडी को पीएम के लिए हमीदिया भेज दिया।
दोपहर तीन बजे से खड़ी थी कार
घटना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि कार सोमवार दोपहर करीब तीन बजे से खड़ी थी। ड्राइवर के बगल वाली सीट पर पैर पर पैर रख कर सुरेंद्र कुमार की लाश पड़ी थी। इस दौरान पुलिस ने रात्रि गश्त भी की, लेकिन गश्त टीम को भी रात में कलारी के पास से कार नहीं दिखी। मंगलवार सुबह १०.४५ बजे जब लोगों ने फोन कर सूचना दी तो पुलिस को इसकी जानकारी मिली।
१ साल पहले धार से हुआ था ट्रांसफर
सुरेंद्र कुमार मूल रूप से ग्वालियर के रहने वाले हैं। उनकी दो शादी हुई हैं। एक पत्नी दुर्गा ग्वालियर में रहती है। दूसरी लक्ष्मी साथ रहती है। दोनों पत्नी से कोई संतान नहीं है। पत्नी लक्ष्मी ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से दिन-रात शराब पीते थे। एक साल पहले ही धार से ट्रांसफर हुआ था।
डिक्की में मिले प्रेस किए हुए कपड़े
कार की डिक्की में एफएसएल टीम को प्रेस किए हुए कपड़े मिले हैं। साथ ही चटनी का पैकेट, शराब की बॉटल, नमकीन और स्लीपर मिला है। पत्नी के अनुसार वे शादी में जाने के लिए निकले थे, लेकिन किसके यहां शादी में जाना था यह भी पत्नी को नहीं पता है। भांजे उत्कर्ष ने बताया कि सोमवार दोपहर मामा को करीब १० बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
उठ रहे यह सवाल
ज्वाइंट डायरेक्टर कार में ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे हैं। यानी इनके साथ चालक भी था, अगर तबीयत खराब होने से मौत होती तो चालक को जरूर पता होता, लेकिन चालक इससे अनजान है। चालक ने पुलिस से भी संपर्क नहीं किया। ज्वाइंट डायरेक्टर घर से ऑटो से निकले थे। कार इनके चालक के पास थी। कार से अगर इन्हें जाना ही होता तो वे घर पर भी गाड़ी बुला सकते थे, लेकिन एेसा नहीं किया।