
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित अन्य जिलों में पिछले कुछ दिनों से जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल चल रही थी। जिसके बाद राजधानी भोपाल में तकरीबन सभी जूनियर डॉक्टरों और नर्सों के हड़ताल समाप्त कर काम पर लौट आने से अस्पतालों की व्यवस्था नॉर्मल हो गई हैं। पर, अभी भी प्रदेश के अन्य जिलों में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी है।
आपको बता दें कि जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई थी। मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा था। वे घंटों अस्पतालों के बाहर बैठकर डॉक्टर का इंतजार करते, ताकि उनका व उनके घर वालों का उपचार हो सके। पर, शनिवार को हड़ताल समाप्त होने से अस्पतलों की व्यवस्था में सुधार आया है।
जबकि इससे पहले स्टायपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रही जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर सरकार पूरी सख्ती से आने की तैयारी कर चुका है। कहा जा रहा था कि सरकार ने 300 से अधिक जुनियर डॉक्टरों की सूची तैयार कर ली है। जूडा शुक्रवार की शाम तक अगर काम पर नहीं लौटे तो इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाएंगे।
खबर ये भी थी कि कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर जूडा के 24 डॉक्टरों के खिलाफ कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट लगाया जाएगा। हाईकोर्ट ने पहले ही जूनियर डॉक्टर की हड़ताल अवैध घोषित किया था। जिसके बाद भी डॉक्टर हड़ताल पर थे। शुक्रवार की शाम 5 बजे तक जूनियर डॉक्टर्स काम पर नहीं लौटे तो सरकार स्टेटस रिपोर्ट बनाकर हाईकोर्ट में पेश करेगी।
हड़ताल के चलते अस्पतालों की व्यवस्था चरमराई
पांच दिन से चल रहे जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से अस्पतालों की व्यवस्थाएं चरमरा गई थी। सरकार ने इंदौर और ग्वालियर के 8 और जूनियर डॉक्टर को बर्खास्त किया था। इसके पहले कोर्ट ने भोपाल, इंदौर, रीवा, ग्वालियर और जबलपुर मेडिकल कॉलेजों के 24 डॉक्टरों को निष्कासित किया था। इधर, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल अवैध ठहराने के बाद राज्य सरकार ने भी सख्त रवैया दिखाया। अवैध रूप से हड़ताल कर रहे है जूडा के पंजीयन भी खत्म कराने की तैयारी चल रही थी।