
IAS Transfer : मध्यप्रदेश में बड़े अधिकारियों पर सत्ता और संगठन की गहरी नजर है। उनके कामकाज और आमजनों से बर्ताव के साथ ही बीजेपी कार्यकर्ताओं, नेताओं, विधायकों, सांसदों, मंत्रियों से संबंधों के आधार पर भी अधिकारियों का आकलन किया जा रहा है। बीजेपी सरकार और संगठन की नजर आगामी विधानसभा चुनावों पर भी है जोकि अब 2 वर्ष दूर हैं। इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए ही अधिकारियों को
जिम्मेदारियां दी जा रहीं हैं। राज्य की मोहन यादव सरकार शुरु से ही प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था में लगातार बदलाव करती रही है। पिछले 3 माह में ही करीब दो दर्जन जिलों के कलेक्टर और एक दर्जन जिलों के एसपी बदले गए हैं। प्रदेश में अब एक और प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार दीपावली के बाद और जनवरी 2027 से पहले प्रदेशभर में आइएएस को बड़े पैमाने पर इधर से उधर किया जाएगा। इसके लिए भोपाल में व्यापक विचार विमर्श किया जा रहा है।
आइएएस अशोक बर्णवाल ने 23 जुलाई को प्रदेश के मुख्य सचिव पद का कार्यभार संभाला था। तब से करीब 36 आइएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली जा चुकी हैं। लगभग डेढ दर्जन आईपीएस के दायित्व भी बदले गए। प्रदेश में इस अवधि में जहरीली शराब कांड, किसान आंदोलन, राजनैतिक विवाद जैसे कारणों से प्रशासनिक फेरबदल किया गया।
जहरीली शराब कांड के मामलों में 6 से ज्यादा आईएएस-आईपीएस अधिकारी प्रभावित हुए। इनमें से कई को फील्ड से ही हटा लिया गया। किसान आंदोलन की वजह से भी कई अधिकारियों को हटाया गया।
राज्य में एक बार फिर जबर्दस्त प्रशासनिक उठापटक होनेवाली है। दीपावली के बाद और जनवरी 2027 के पहले आइएएस अफसरों की जंबो तबादला सूची आएगी। इसमें कई एसीएस, प्रमुख सचिव, सचिव, संभागायुक्त और कलेक्टरों के दायित्व बदल दिए जाएंगे। उक्त सूची में शामिल संभावित नामों में से कुछ के आदेश तो जनवरी 2027 के पहले भी जारी हो सकते हैं।
आइएएस अधिकारियों की प्रस्तावित तबादला सूची कई मायनों में अहम होगी। हालांकि सूची जारी हो, उसके पहले सत्ता व संगठन द्वारा मोहन सरकार के 3 वर्ष पूरे होने के मौके पर मंथन करेंगे तो मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल स्वामित्व योजना में भूमि पत्रकों की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान की समीक्षा करने वाले हैं। दोनों स्तर पर देखा जाएगा कि जिलों में सरकार की प्राथमिकता वाला उक्त काम क्यों पिछड़ा है।