भोपाल

देवगुरु बृहस्पति से बना महाशक्तिशाली योग, 4 दिनों तक बहुत फलदायी होगी पूजा-पाठ और साधना

jupiter in pushya nakshatra until august 19 : पुष्य नक्षत्र में 19 अगस्त तक रहेंगे देवगुरु बृहस्पति, गुरु पुष्य योग का है बहुत महत्व, ईश्वर आराधना का मिलता है स्थायी फल
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Aug 15, 2026
देवगुरु बृहस्पति
देवगुरु बृहस्पति- image patrika.com

Jupiter in Pushya Nakshatra : ज्ञान, उच्च शिक्षा और वृद्धि के कारक ग्रह देवगुरु बृहस्पति इन दिनों पुष्य नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। वे 19 अगस्त तक इसी नक्षत्र में संचरण करेंगे। इसके बाद देवगुरु बृहस्पति अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। इस प्रकार पुष्य नक्षत्र में गुरु का संचरण अब केवल 4 दिनों का ही शेष है। ज्योतिष शास्त्र में यह गोचर बहुत ही शुभ माना जाता है। खास बात यह है कि गुरु पुष्य का यह संयोग न केवल भौतिक विषयों के लिए, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान की गई पूजा पाठ और साधना बहुत फलदायी होती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि धर्मग्रंथों और ज्योतिष में गुरु पुष्य योग को सबसे शुभ और दुर्लभ योगों में से एक माना गया है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा गया है। इसके स्वामी शनि देव हैं। देवगुरु बृहस्पति ज्ञान, धन, संतान, शिक्षा और भाग्य के कारक माने जाते हैं। गुरु पुष्य योग का निर्माण होते ही गुरु ग्रह की शुभता शनि के पुष्य नक्षत्र की ऊर्जा से जुड़ जाती है। यह देश—दुनिया के लिए बहुत लाभकारी होती है।

जिन जातकों की कुंडली में देवगुरु बृहस्पति की स्थिति अच्छी है, उनके लिए तो यह योग किसी वरदान से कम नहीं! कुंडली में बृहस्पति के मजबूत रहने, कारक होने, शुभ होने की स्थिति में गुरु पुष्य योग में व्यक्ति की बहुत उन्नति होती है। उसे समृद्धि की प्राप्ति होने लगती है और जीवन में अनेक शुभ अवसर भी प्राप्त होते हैं। गुरु पुष्य की अवधि के दौरान सोना, चांदी की खरीदी विशेष फलदायी मानी जाती है। इस ​अवधि में भूमि और वाहन खरीदना, नए व्यवसाय और नए निवेश की शुरुआत करना भी शुभफलदायक होता है।

गुरु पुष्य योग के अभी भी 4 दिन शेष

गुरु पुष्य योग में देवगुरु बृहस्पति का प्रभाव और पुष्य नक्षत्र की शुभ ऊर्जा जब एक साथ एक्टिव होती है तब मानो चमत्कार सा हो जाता है। साल 2026 में यह विशेष संयोग लंबे समय तक प्रभावी रहा है। गुरु पुष्य योग के अभी भी 4 दिन शेष हैं। धार्मिक कार्यों, निवेश, संपत्ति खरीद, शिक्षा, विवाह संबंधी चर्चाओं और नए कार्यों की शुरुआत के लिए यह अवधि अत्यंत शुभ हो सकती है।

ईश आराधना में सबसे ज्यादा महत्व

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गुरु पुष्य योग का ईश आराधना में सबसे ज्यादा महत्व है। इस अवधि में की गई पूजा, पाठ, साधना आदि का न केवल त्वरित फल मिलता है बल्कि यह स्थायी भी होता है। जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए गुरु पुष्य की शुभ ​अवधि का समुचित लाभ उठाना चाहिए। इस योग का आध्यात्मिक प्रभाव हमारे जीवन में ईश्वर के आशीर्वाद के रूप में चिरकाल तक बना रहेगा।

Updated on:
15 Aug 2026 02:01 pm
Published on:
15 Aug 2026 01:10 pm