भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने ही परिवार का सदस्य बताया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने धारा 370 पर सरकार का समर्थन किया है।
भोपाल. धारा 370 में मोदी सरकार के फैसले का समर्थन करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ( Jyotiraditya Scindia ) एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। धारा 370 में मोदी सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट करते हुए कहा था- जम्मू कश्मीर और लद्दाख को लेकर उठाए गए कदम और भारत देश मे उनके पूर्ण रूप से एकीकरण का मैं समर्थन करता हूं। संवैधानिक प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया जाता तो बेहतर होता, साथ ही कोई प्रश्न भी खड़े नहीं होते। लेकिन ये फैसला राष्ट्र हित में लिया गया है और मैं इसका समर्थन करता हूं। सिंधिया के इस ट्वीट के बाद भाजपा के नेताओं ने सिंधिया को भाजपा परिवार का ही सदस्य बताया है।
प्रभात झा ने किया सिंधिया के फैसले का स्वागत
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ( Prabhat jha ) ने शनिवार को भोपाल में कहा- सिंधिया ने धारा 370 हटाने का समर्थन कर साबित किया है कि वो राजमाता विजयाराजे सिंधिया के पौत्र हैं। प्रभात झा ने कहा कि सिंधिया भाजपा के परिवार के ही हैं वो कोई अलग परिवार के नहीं हैं। उनके पिता माधव राव सिंधिया ( Madhavrao Scindia ) ने पहला चुनाव जनसंघ के चुनाव चिन्ह पर ही लड़ा था। झा ने कहा- ज्योतिरादित्य सिंधिया वैसे तो राहुल गांधी ( Rahul Gandhi ) ब्रिगेड के माने जाते हैं लेकिन राहुल गांधी से ज्यादा बड़ा उन्होंने भारत माता को माना है।
विचारधारा की लड़ाई
झा ने कहा- राजनीति में किसी भी व्यक्ति की कोई दुश्मनी नहीं होती है। ये विचारधारा की लड़ाई है। जरूरी नहीं है कि जिसकी विचारधारा आज हमारे खिलाफ है वो हो सकता है कि कल हमारी विचार धारा प्रभावित हो जाए। उन्होंने कहा में सिंधिया जी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकता हूं।
पवैया ने कहा था कांग्रेस छोड़ दें
वहीं, मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने धारा 370 पर सिंधिया के समर्थन करने पर कहा था कि, सिंधिया जी कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो जाएं हम उनका स्वागत करेंगे।
भाजपा की संस्थापक सदस्य थीं राजमाता
बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ( vijayaraje scindia ) भाजपा की संस्थापक सदस्य थीं। वहीं, उनके पिता माधवराव सिंधिया ने पहली बार जनसंघ के टिकट से सांसद बने थे। 1969 में जब इंदिरा सरकार ने प्रिंसली स्टेट्स की सारी सुविधाएं छीन लीं तो विजयाराजे सिंधिया जनसंघ में शामिल हो गईं थीं। बेटे माधव राव सिंधिया को भी उन्होंने जनसंघ ज्वाइन करया था।
1971 के चुनाव में जब देश में चारों तरफ इंदिरा गांधी की लहर थी तब 26 साल की उम्र में गुना संसदीय सीट से माधवराव सिंधिया जनसंघ के टिकट पर पहली बार चुनाव जीतकर सांसद पहुंचे थे। फिर जब अगला चुनाव 1977 में इमरजेंसी के बाद हुआ तब माधव राव सिंधिया गुना संसदीय सीट से दोबारा चुनाव जीते हालांकि इस बार उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था।