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भोपाल रेलवे ने किया कमाल, कंडम डिब्बों से बनाए ऐसे लकदक कोच जिनमें नहीं लगेगा जरा भी झटका

Bhopal Railway- हाई रेजिस्टेंस कोच बनाए भोपाल रेलवे ने, उम्र में कई साल का किया इजाफा, सवारी डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाना में किया बदलाव

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Bhopal Railways Transforms Condemned Coaches into Luxurious Train Carriages

Bhopal Railways Transforms Condemned Coaches into Luxurious Train Carriages- Demo pic

Bhopal Railway- ट्रेनों के ये डिब्बे पूरी तरह टूट फूट चुके थे। डिब्बों के अंदर की सीटें खराब हो चुकी थीं और बाहर की रंगत भी मिट चुकी थी। ये पुराने डिब्बे अब किसी भी काम के नहीं बचे थे। ट्रेनों के इन कंडम डिब्बों को भी रेलवे ने यूं ही बेकार जाया नहीं किया। भोपाल के सवारी डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाना के कर्मचारियों, अधिकारियों ने अपने हुनर से इन खराब डिब्बों को लकदक कोच में बदल दिया। खराब पड़े इन डिब्बों का अब दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। इन्हें हाई रेजिस्टेंस कोच के रूप में विकसित किया गया है जिससे यात्रियों को अधिक स्पीड में भी सफर के दौरान जरा भी झटके नहीं लगेेंगे। इतना ही नहीं, रेलवे ने इन कंडम डिब्बों की ऐसी हाईटेक सर्जरी की है कि अब इनकी उम्र भी बढ़ गई है। कई सालों तक इन कोचोें को कुछ नहीं बिगड़ेगा।

ट्रेनों के 96 कंडम डिब्बों को बनाया हाई रेजिस्टेंस कोच

भोपाल रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि एक-दो नहीं बल्कि पूरे 96 कंडम हो चुके कोचों को पुनर्जीवित किया गया है। भोपाल सवारी डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाना में इन डिब्बों को नया जीवन दिया गया। कारखाने में कंडम कोचोें को हाई रेजिस्टेंस कोच में बदल दिया गया है।

भोपाल रेलवे के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि रेलवे एक विशेष अभियान चला रहा है। इसमें सेफ़्टी मिशन के अंतर्गत अपने संसाधनों को नई गति देने के लिए अनेक काम किए जा रहे हैं। इसी के तहत पुराने कंडम डिब्बों को नए लकदक कोच में बदलने की कवायद चालू की गई थी। भोपाल सवारी डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाना के इंजीनियरों, कर्मचारियों ने अपनी मेहनत और कौशल के बलबूते यह कमाल कर दिखाया।

कोच फैक्ट्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के टारगेट के अंतर्गत 96 सबसे खराब हालत वाले रेलवे कोच को नए बनाने का काम हाथ में लिया था। कोच फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार पुराने डिब्बों की हाईटेक प्रियॉडिक ओवरहॉलिंग कर उन्हें नई रंगत दी गई। इसी के साथ कंडम कोचों को हाई रेजिस्टेंस कोच में बदल दिया। यानी अब इन डिब्बों का हाई स्पीड इंजन के रैक के तौर पर ट्रेनों में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा।

अधिकारियों का दावा है कि 90 और 100 की स्पीड पर चलने के बावजूद यात्रियों को इन कोचों में बैठने पर जरा भी झटके महसूस नहीं होंगे। रेलवे के अधिकारियों ने यह दावा भी किया है कि कंडम कोच की हाईटेक सर्जरी के बाद इनकी उम्र 15 से 20 साल तक बढ़ गई है।