मोदी पर भारी पड़ेगा ये चुनाव, बीजेपी के वोट बैंक पर कांग्रेस का बड़ा अटैक
भोपालः मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ती जा रही है। एक तरफ जहां राजनीतिक गौपनीय और सार्वजनिक तौर पर चुनाव साधने के लिए रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं, तो वहीं प्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा हालही में लिये गए फैसले से बीजेपी के वोटबैंक पर गहरा असर पड़ सकता है। दरअसल, प्रदेश की कमलनाथ सरकार अपने कार्यकाल के 80 दिन पूरे करने वाली है। इस दौरान सरकार ने पार्टी द्वारा दिये गए वचन पत्र के एक और वादे को पूरा करते हुए प्रदेश के ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण, साथ ही एससी-एसटी वर्ग का एक लाख रुपये तक कर्ज माफ करने फैसला लिया है।
लोकसभा में बदलेंगे समीकरण
सरकार के इस फैसले को अगर लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जाए, तो कमलनाथ ने प्रदेश के ओबीसी तबके को काफी प्रभावित किया है। ये वर्ग अब तक बीजेपी का खास वोटर माना जाता है, लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद जो खुशी प्रदेश के ओबीसी वर्ग के चेहरे पर है, उससे साफ है कि, भाजपा को अगले लोकसभा चुनाव में तगड़ा झटका लग सकता है। नाथ के इस फैसले से ओबीसी वोट इस बार चुनाव में भाजपा के पाले से सिखक सकता है। वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश बीजेपी जिन मुद्दों को लेकर प्रदेश सरकार को लोकसभा चुनाव में घेरने का मन बना रही थी, लगभग वो सभी मुद्दे सीएम नाथ ने भाजपा के हाथों से छीन लिये हैं।
ये है लोकसभा में भाजपा को नुकसान पहुंचाने की वजह
अब कांग्रेस के नज़रिये से देखें तो उसने मध्य प्रदेश का सबसे बड़े वोटर, यानि किसान को कर्जमाफी की प्रक्रिया शुरु करके लगभग साध लिया है। इसके बाद प्रदेश में ओबीसी वर्ग बड़ी आबादी रखता है। जिसे आरक्षण और कर्जमाफी का फैसला लेने के बाद भाजपा के हाथों से लगभग खीच लिया है। खास बात ये भी है कि, कमलनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी के पाले से फिल्म अभिनेता सलमान खान को भी अपनी ओर खींच लिया है। मतलब, फिल्म अभिनेता सलमान खान इंदौर की संभावित सीट से सांसद चुनाव ना भी लड़ें तब भी इसका लाभ कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में मिलेगा। क्योंकि, सलमान लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश की ब्रॉडिंग करते नज़र आएंगे। सरकार के इन फैसलों से विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे तबादला उद्योग का आरोप भी दब से गए हैं। यानि साफ है कि, विपक्ष के पास सररकार को घेरने के लिए फिलहाल कोई बड़ा मुद्दा नहीं बचा है। इन सब को देखते हुए राजनीतिक जानकारों का अनुमान है कि, लोकसभा के एंगल से कांग्रेस का पलड़ा बीजेपी से कई ज्यादा भारी दिखता नज़र आ रहा है। जिसका नुकसान भाजपा को होना संभव है।
कमलनाथ ने लिया ये फैसला
विधानसभा के चुनावी मैदान में कूदने से पहले कांग्रेस ने प्रदेश के किसानों को वचन दिया था कि, ओबीसी वर्ग का 2 लाख तक कर्ज माफ किया जाएगा। ऐलान के अनुसार, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया कि, लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले राज्य के 25 लाख किसानों का कर्जा माफ हो जाएगा। शेष किसानों को आचार संहिता हटने के बाद कर्जमाफी का लाभ दिया जाएगा। भाजपा कर्जमाफी को मुद्दा बनाकर लोकसभा चुनाव में केश करना चाहती थी। लेकिन, कमलनाथ द्वार वचन पत्र को प्राथमिकता देने से भाजपा के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, जिससे वो लोकसभा चुनाव कांग्रेस पर भारी पड़ सके।