भोपाल

मतदान में बढ़-चढ़ कर लेते हैं हिस्सा, फिर भी सालों से कच्ची है बस्ती, विकास धीमा

कच्ची बस्ती, पक्के वोट: साल-दर-साल करते रहे वादे, लेकिन हालात जस के तस रहे
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Nov 02, 2018
news
Bhim nagar

भोपाल. राजधानी के बीचों-बीच दक्षिण-पश्चिम विधानसभा और आधा शहर-आधा ग्रामीण क्षेत्र तक फैली हुजूर विधानसभा... दोनों से शहर की तस्वीर देखी जा सकती है। दक्षिण-पश्चिम में आधी आबादी सरकारी कर्मचारियों की है। हुजूर का शहरी हिस्सा भी बस्तियों से भरा हुआ है। दोनों ही क्षेत्रों में साल-दर-साल चुनावों के दौरान कई वादे किए जाते रहे, लेकिन यहां के हालात नहीं बदले। दक्षिण-पश्चिम की ओम नगर-वल्लभ नगर-भीम नगर सबसे बड़ी बस्ती हैं तो हूजूर की दामखेड़ा ए सेक्टर में हजारों की बसती है। दोनों के रहवासियों ने कई नेताओं को विधानसभा पहुंचाया, लेकिन इनके हालात वही हैं। नाम के लिए पीने के पानी, सीवेज जैसी समस्याएं कहीं-कहीं हल कर दी गईं हैं। फिर भी ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं आया जिससे इन बस्तियों की तस्वीर बदले। जबकि इनके एक तरफा वोट संबंधित उम्मीदवारों को मिलते हैं।

दक्षिण पश्चिम: सात हजार लोग अब सोच-समझकर देंगे वोट
य हां की सबसे बड़ी बस्ती भीम नगर है, जिसमें 7 हजार से अधिक झुग्गियां हंै। इससे लगी हुई वल्लभ नगर, ओम नगर की तस्वीर भी जुदा नहीं है। देखते ही देखते 30 साल पहले यहां इतनी झुग्गियां बस गईं। यहां के वोट एक ही दल को जाते हैं। वल्लभ नगर की आबादी पहले एक दल को वोट देती थी, अब ट्रेंड बदल गया। इन बस्तियों में सबसे अधिक बिहारी-भोजपुरी, मराठी, निमाड़ी लोग रहते हैं। स्थानीय निवासी लिंबाराम नांगले का कहना है कि लोग आते हैं, वोट ले जाते हैं। इसलिए जनता समझदार हो गई है अब हम विकास करने वाले का ही वोट देते हैं।

इन बस्तियों के लोगों शिफ्टिंग का डर था, लेकिन अब तय हो गया है कि इन्हें नहीं हटाया जाएगा। यहां पर स्ट्रीट लाइट के लिए 50 लाख स्वीकृत किए हैं। तीन टॉयलेट, आंगनवाड़ी और स्कूल की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है।
उमाशंकर गुप्ता, विधायक दक्षिण पश्चिम

हुजूर: जनता ने तय कर लिया जो हमारे लिए, हम उसके लिए
य हां 3 हजार से अधिक झुग्गियां हैं, लेकिन सुविधाविहीन। इस बस्ती के वोट भी उम्मीदवार का भाग्य तय करते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई सुध लेने नहीं आता। यहां बी-सेक्टर में भी 3 हजार झुग्गियां हैं। पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं की गई। गंदगी भी बीमार कर रही है। बच्चों के लिए सरकारी स्कूल नहीं हंै। इस क्षेत्र की आबादी डेंगू-मलेरिया के कारण सबसे अधिक परेशान है लेकिन डिस्पेंसरी नहीं है। यहां एससी-एसटी आबादी व बिलासपुर के लोग सबसे अधिक निवास कर रहे हैं। रहवासी आंचल प्रजापति का कहना है कि गरीब लोग ही सबसे अधिक वोट देने जाते हैं, लेकिन वे ही परेशान हो रहे हैं। इस बार तय कर लिया है, जो हमारे लिए, हम उसके लिए।

मैंने काफी काम किया है। कई जगह एक करोड़ रुपए तक के स्कूल भवन मंजूर करवाए हैं। विकास के लिए कोई कमी नहीं रहने दी। मैं संतुलित विकास पर जोर दे रहा हूं।
रामेश्वर शर्मा, विधायक, हुजूर

Published on:
02 Nov 2018 04:04 am