
Balaghat : बालाघाट में रक्षाबंधन के ऐन पहले दर्दनाक घटना घटी। यहां मलेरिया पीडि़त दो और बच्चों की मौत हो गई। प्रशासन ने इनमें से 1 का आनन-फानन में अंतिम संस्कार करा दिया। इसपर कांग्रेस ने गुस्सा जताया। पार्टी के वरिष्ठ नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे अमानवीयता करार दिया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बालाघाट की इस घटना पर अधिकारियों को हर हाल में जवाब देना होगा। बालाघाट में बीमारी से अब तब 26 बच्चों की जान जा चुकी है। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने चक्काजाम किया।
बालाघाट में बैगा बहुल बिरसा और बैहर के वनांचल क्षेत्रों में मासूमों की जान जाने का सिलसिला जारी है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के दौरे-समीक्षा बैठकों के बावजूद यह क्रम चल रहा है।
ताजा मामलों में लालपुर पंचायत की धामनगांव निवासी माही मरकाम (4) ने जिला अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बैहर के बैगाटोला गांव में लवकुश (4) की भी जान चली गई।
लवकुश के मामले में प्रशासन की कार्यशैली सवालों में हैं। बच्चे के माता-पिता हैदराबाद में मजदूरी करते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संक्रमण फैलने का हवाला देकर प्रशासन ने माता-पिता के पहुंचने से पहले ही बच्चे का अंतिम संस्कार करा दिया। बेचारे मां पिता अपने बेटे का चेहरा भी नहीं देख सके, इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने बंजारी तिराहे पर चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। रूपझर टीआई के कार्रवाई के आश्वासन के बाद जाम समाप्त हुआ। उधर, मामले पर पक्ष जानने के लिए बिरसा बीएमओ को फोन किया गया तो नंबर बंद मिला। सीएमएचओ डॉ. परेश उपलव ने 'मीटिंग में हूं' कहकर बात करने से इनकार कर दिया।
बच्चे के अंतिम संस्कार में ऐसी जल्दबाजी पर कांग्रेस ने गुस्सा जताया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह सरासर असंवेदनशीलता है। अधिकारियों को इसका जवाब देना होगा।
माता-पिता के पहुंचने से पहले बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया, क्या यही है सरकार की संवेदनशीलता?
आक्रोशित ग्रामीण सड़क पर हैं, लेकिन सरकार की संवेदनाएं न जाने किस अनजान रास्ते पर गुम हैं।
हमें जवाब चाहिए!