
कानून मंत्री से 'पत्रिका' की विशेष बातचीत
भोपाल। सीबीआइ दो अफसरों के विवाद का अखाड़ा बन गया था। हमें सीबीआइ की स्वायत्तता के साथ उसकी प्रतिष्ठता की भी चिंता है। आज भी पीडि़त यही कहता है, हमें कुछ नहीं चाहिए बस सीबीआइ से जांच करा लो, इसीलिए सरकार ने दोनों अफसरों को हटाकर जांच शुरू कराई। यह बात कानून एवं आइटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 'पत्रिका' से विशेष बातचीत में कही।
प्रश्नः क्या आपको लगता है कि भाजपा के सामने मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कुछ रोड़े हैं?
पहले आप देखिए कि देश कैसे बदला है। 2014 में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हम केंद्र में आए। उसके बाद जितने भी चुनाव हुए, सिर्फ बिहार और दिल्ली को छोड़़कर सब जीते हैं। कर्नाटक में भी हम जीते हुए ही हैं। नए क्षेत्रों में भाजपा ने प्रवेश किया है। इन तीनों राज्यों की सरकारों ने भी बहुत अच्छा काम किया है। इसलिए तीनों जगह हमारी सरकार बनना तय है।
प्रश्नः मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा में भारी बगावत और असंतोष देखने को मिला है? मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में 15 वर्ष की एंटी इंकम्बेंसी भी है?
अब एंटी इंकम्बेंसी का पारंपरिक विचार खत्म हो रहा है। उसकी जगह प्रो-इंकम्बेंसी की अवधारणा भी आई है। नितिश कुमार, शिवराज सिंह और रमन सिंह लगातार मुख्यमंत्री बने ही हुए हैं। जहां तक बागियों की बात है तो यह हमारी पार्टी की ही हिम्मत है कि 60 लोगों टिकट काटे हैं, इनमें कुछ मंत्री भी हैं।
प्रश्नः दिग्विजय ने कहा है- भीमा कोरेगांव में उनके खिलाफ सबूत है तो पुलिस गिरफ्तार क्यों नहीं करती है?
यह उनकी राजनीतिक टिप्पणी है। पुणे पुलिस कार्रवाई कर रही है। इस देश में बोलने की पूरी आजादी है, लेकिन भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह-इंशाअल्लाह बोलने की इजाजत कतई नहीं दी जाएगी। दिग्विजय के साथ यह पहली बार नहीं हुआ। उन्होंने तो जाकिर नायक को शांति का देवदूत कहा था। जाकिर भारत को तोड़ने की बात कहते थे, उसके बाद मलेशिया भाग गए।
प्रश्नः सीबीआइ को लेकर लगातार विवाद जारी है?
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ चीफ की रिपोर्ट मीडिया में लीक होने पर गभीर टिप्पणी की है। इस तरह के बेबुनियाद आरोपों से हमें भी पीड़ा हुई है। सीबीआइ की संस्थागत प्रतिष्ठा को बरकरार रखना चाहिए। यह दुर्भाग्य था कि सीबीआइ के दो अफसरों में विवाद हुआ। सरकार ने जांच का फैसला किया है।
प्रश्नः कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र की भाजपा को अचानक चिंता क्यों हो गई है?
क्योंकि कांग्रेस का नारा है लोकतंत्र हमें बचाना है, मोदी-शाह और भाजपा से। राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनने बाद प्रधानमंत्री को लेकर घटिया शब्दावली और निम्न स्तर की बाते करते हैं। राहुल की और कोई क्षमता नहीं है सिर्फ इसके कि वो नेहरू-गांधी परिवार में पैदा हुए हैं। वरना वो अपनी पार्टी के जिला अध्यक्ष भी नहीं बन पाते। राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और शाह बूथ की राजनीति करके अध्यक्ष बने हैं।
प्रश्नः महागठबंधन देश में मजबूत हो रहा है, एनडीए कमजोर हो रहा है? 2019 की लड़ाई मुश्किल नहीं होगी क्या?
आप बताइए, नायडू और ममता का मध्यप्रदेश में कितना वोट है। अब 1995-96 का हिंदुस्तान नहीं है कि गठबंधन की सरकारें बन जाएं। आज देश विकास और स्थायित्व चाहता है। फिर महागठबंधन के नेता तो राहुल को अपना नेता मानने को तैयार ही नहीं है।
प्रश्नः इस बार विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की एकता भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी करेगी क्या?
अब यहां तो लोग मुझसे कह रहे हैं कि कांग्रेस में तो दिग्विजय सिंह की उपेक्षा हो रही है। मुझे यह भी पता चला कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ऐसे वक्त में भी कोपभवन में चल रहे हैं। उनकी यह एकता उन्हें मुबारक, हम तो ईमानदारी से काम करते हैं।