
भोपाल. 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस 19 महीने में ही टूटने लगी है। पिछले पांच माह में उसके 25 विधायकों ने साथ छोड़ दिया है। कांग्रेस को उपचुनाव से पहले कमजोर करने के लिहाज से भी ऐसा हो रहा है। मार्च में कांग्रेस छोडऩे वाले विधायकों में 19 ज्योतिरादित्य सिंधिया के वफादार हैं। बाकी बिसाहूलाल सिंह, ऐदल सिंह कंसाना और हरदीप सिंह डंग सिंधिया के समर्थक नहीं हैं, लेकिन सिंधिया की नाव में सवार होकर मंत्री की कुर्सी की ओर बढ़ गए। ये कमलनाथ कैबिनेट में स्थान न मिलने से नाराज थे। कांग्रेस छोडऩे वाले प्रद्युम्न लोधी, सुमित्रा कासडेकर और नारायण पटेल नए चेहरे थे, लिहाजा इनका कोई गहरा वैचारिक नाता कांग्रेस से नहीं था। ये बड़े नेताओं की मेहरबानी के अलावा कमलनाथ की ओर से किए गए सर्वे के जरिये पार्टी उम्मीदवार बनाए गए थे। ये लोग टिकट बंटवारे के समय पीसीसी को जातीय गणित के मुफीद भी थे। यानी ये बात तय है कि ऐसे ही राजनीति में नए और पहली बार के विधायकों पर भाजपा की नजर है।
- विधानसभा की स्थिति
कुल सीटें : 230
रिक्त सीटें : 27
विधायक : 103
उपचुनाव : 27
भाजपा सदस्य : 107
कांग्रेस सदस्य : 89
कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए : 25
विधायकों के निधन से खाली हुईं सीटें : 2
बहुमत का आंकड़ा : 116
बहुमत के लिए भाजपा को सीट चाहिए : 9
बहुमत के लिए कांग्रेस को सीट चाहिए : 27
- डैमेज कंट्रोल में फेल हुई कांग्रेस
कांग्रेस का मैनेजमेंट इस टूटन को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे अनुभवी और राजनीतिक प्रबंधन के माहिर नेताओं का गणित भी फेल हो गया है। कांग्रेस नेताओं को विधायकों के जाने की भनक भी नहीं लग पा रही है।
- प्रबंधन में जुटे एनपी और सज्जन
कमलनाथ ने अब विधायकों से संपर्क का जिम्मा पूर्व स्पीकर एनपी प्रजापति और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को दे दिया है। इनके साथ पूर्व मंत्री जीतू पटवारी भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। जब मीडिया में खबर चली कि तरुवर सिंह लोधी और राहुल लोधी का मन बदल सकता है तो सज्जन और एनपी ने उनको अपने निवास पर बुलाया और मुस्कुराते हुए मीडिया के सामने आकर बयान दिया कि ये भोपाल आते हैं तो हमसे मिलने आते हैं, पार्टी छोडऩे जैसी कोई बात ही नहीं है। विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा पर संदेह हुआ तो जीतू उनको प्रेस कॉन्फ्रेंस में ले आए जहां उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस में ही रहेंगे। विधायकों को शपथ भी दिलाई जा रही है, लेकिन उसका असर भी कम ही नजर आ रहा है। अब कांग्रेस के दिग्गज नेता भी अपने-अपने समर्थकों को साधने में जुट गए हैं।
- इसलिए छोड़ी कांग्रेस
मंत्री इमरती देवी कहती हैं कि विकास का सारा काम छिंदवाड़ा के लिए ही हो रहा था। हम जब भी अपने काम लेकर जाते तो उनको टाल दिया जाता। हमने अपने क्षेत्र के लोगों से वादा किया था लेकिन हम पूरा नहीं कर पा रहे थे।
निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल कहते हैं कि हम तो निर्दलीय हैं, इसलिए हमें अपने क्षेत्र के विकास के लिए सरकार के साथ रहना होगा। प्रदेश में जो सरकार है हम उसके साथ हैं।
नारायण पटेल कहते हैं कि भाजपा ही विकास करने में सक्षम है, इसलिए हमारे क्षेत्र के विकास के लिए भाजपा में आए।
- लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी
इस दल बदल से जाहिर है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी हो रही है। लोकतंत्र में खरीद-फरोख्त या हॉर्स ट्रेडिंग जैसे किसी भी कृत्य की स्पष्ट मनाही है। सवाल यह भी है कि यदि इस तरह सरकारें चलनी हैं तो चुनाव की आवश्यकता ही क्या है। कांग्रेस के जिन 25 विधायकों ने विधायकी छोड़ी उनको 18 लाख से ज्यादा लोगों ने चुना था। अब उनके इस संवैधानिक अधिकार वोट का क्या मतलब निकला। कांग्रेस कहती है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को खरीदने या उनके दलबदल की कोई व्यवस्था नहीं है। भाजपा देश की सभी संस्थाओं को नष्ट करने पर तुली हुई है। चाहे आप मध्यप्रदेश, कर्नाटक या राजस्थान का उदाहरण देख लीजिए। कांग्रेस के इस तर्क को भाजपा हास्यास्पद बताती है,भाजपा कहती है कि आपातकाल लगाने वाले कब से लोकतंत्र की फिक्र करने लगे।
- सीधी बात
कमलनाथ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
सवाल : विधायक एक के बाद एक कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो रहे हैं, क्या कारण मानते हैं?
जवाब : भाजपा विपक्ष के विधायकों को प्रलोभन देकर उनके इस्तीफे कराकर पार्टी में शामिल करा रही है। ऐसे अनैतिक कृत्य कर उपचुनावों का बोझ जनता पर डाला जा रहा है। मेरी चिंता सिर्फ प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरने तक सीमित नहीं है। इस प्रजातांत्रिक भूचाल का केंद्र बिंदु केंद्र में निहित है।
सवाल. क्या प्रजातांत्रिक मूल्यों वाले इस देश में ये सब उचित है?
जवाब : अब प्रजातंत्र और संविधान का कोई मतलब नहीं है, अब तो बस बोली लगाओ और राजनीति करो। अब इनसे कांग्रेस नहीं जनता निपटेगी। भाजपा जनता को मूर्ख समझती है क्या। लोकतंत्र की गिरती हुई शाख को बचाने के लिए अवसरवादी नेताओं जो प्रजातंत्र का सौदा करते हैं, उनको दूसरे दल में स्थान नहीं मिलना चाहिए। मैंने ये बात प्रधानमंत्री से भी कही है।
सवाल : उपचुनाव से क्या उम्मीद करते हैं?
जवाब : उपचुनाव में पार्टी के साथ गद्दारी करने वाले नेताओं को जनता सबक सिखाएगी। इन्होंने उन लोगों का अपमान किया है, जिन्होंने इनको वोट दिया और पद और पैसे के लालच में ये पार्टी को छोड़ गए।
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वीडी शर्मा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
सवाल . इतने जल्दी-जल्दी विधायक दल-बदल रहे हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं?
जवाब : कमलनाथ में अपना परिवार संभालने का सामथ्र्य नहीं है। सारे पद वे अकेले लेकर बैठे हैं। कांग्रेस में कई योग्य विधायक हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं होती। सरकार थी तब भी उनको चलो-चलो कहकर टाल दिया जाता था, इसलिए कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ रहे हैं, यहां उनको पूरा सम्मान मिल रहा है।
सवाल . भाजपा पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि पार्टी सरकार बचाने के लिए विधायकों को प्रलोभन दे रही है?
जवाब : कांग्रेस के विधायक अपनी विधायकी छोड़कर भाजपा के पास आ रहे हैं तो सोचिए वे कांग्रेस में किस तरह की घुटन महसूस कर रहे होंगे। विधायकों को प्रलोभन देने की परंपरा भाजपा में नहीं हैं, ये कांग्रेस की संस्कृति है जो नोट फॉर वोट जैसे कारनामे करती है। कांग्रेस की सरकार अपने अंतर्विरोध के कारण गिरी है और जनता से झूठ बोलकर कांग्रेस ने सरकार बनाई थी।
सवाल. क्या प्रजातांत्रिक मूल्यों वाले इस देश में ये सब उचित है?
जवाब : लोकतंत्र में असहमति और विरोध का महत्त्वपूर्ण स्थान है, लेकिन आपातकाल के समर्थक इसे कैसे समझ सकते हैं। कमलनाथ को इस बारे में आत्मावलोकन करने की आवश्यकता है। कांग्रेस का चरित्र ही अलोकतांत्रिक है और इसीलिए आज इस प्रकार की परिस्थितियां निर्मित हुई हैं।
- 18.37 लाख वोटरों का मत छोड़ा
कांग्रेस से भाजपा में जाने वाले 25 विधायकों ने प्रदेश के 18 लाख 37 हजार से ज्यादा वोटरों का मत छोड़ दिया। जनता ने इन्हें वोट तब दिए थे, जब कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर भाजपा के खिलाफ लड़े थे।
ये कांग्रेस से भाजपा में गए - सीट - वोट मिले थे
प्रद्युम्न सिंह तोमर - ग्वालियर - 92,055
रघुराज कंसाना - मुरैना - 68,965
कमलेश जाटव - अंबाह - 37,343
रक्षा सरौनिया - भांडेर - 73,569
जसपाल सिंह जज्जी - अशोकनगर - 65,750
इमरती देवी - डबरा - 90,598
प्रभुराम चौधरी - सांची - 89,567
तुलसी सिलावट - सांवेर - 96,535
सुरेश धाकड़ - पोहरी - 60,654
महेंद्र सिंह सिसोदिया - बमोरी - 64,598
ओपी एस भदौरिया - मेहगांव - 61,560
रणवीर जाटव - गोहद - 62,981
गिर्राज दंडोतिया - दिमनी - 69,597
जसवंत जाटव - करैरा - 64,201
गोविंद राजपूत - सुरखी - 80,806
मुन्ना लाल गोयल - ग्वालियर पूर्व - 90,133
बृजेंद्र यादव - मुंगावली - 55,346
राज्यवद्र्धन सिंह राठौर - बदनावर - 84,499
मनोज चौधरी - हाटपिपल्या - 83,337
बिसाहू लाल सिंह - अनूपपुर - 62,770
हरदीप डंग - सुवासरा - 93,169
एंदल सिंह कसाना - सुमावली - 65,455
प्रद्युम्न सिंह लोधी - मलेहरा - 67,184
सुमित्रा कासडेकर - नेपानगर - 85,320
नारायण पटेल - मांधाता - 71,228
(सभी 25 सीट के कुल वोट- 18 लाख 37 हजार 220)