भोपाल

Life school : 24 साल की पियुली बच्चों को एक्सपीरियंशल लर्निंग से सिखाती हैं रियल लाइफ एक्सपीरियंस

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी से पासआउट 24 साल की पियुली घोष का इनिशिएटिव, बच्चों को लाइव एक्सपीरिएंस के माध्यम से सिखाते हैं सस्टेनेंस, सिविक, बिहेबियर एंड पर्सनैलिटी स्किल

3 min read
Mar 25, 2019
Life School By Piyuli ghosh

विकास वर्मा, भोपाल। सड़क पर पैदल चल रहे हों तो फुटपाथ का उपयोग करें और बिना फुटपाथ वाली सड़क पर जहां सामने से टै्रफिक आ रहा हो वहां बाईं ओर नहीं बल्कि एकदम दाईं ओर यानि राइड साइड चलें। सड़क पर मौजूद पेडेस्ट्रियन को कैसे क्रॉस करते हैं? घर में अचानक कोई इलेक्ट्रिक फॉल्ट हो जाए तो इलेक्ट्रीशियन के आने से पहले इलेक्ट्रिक फॉल्ट को कैसे डिटेक्ट करें? घर में कोई नहीं है तो हेल्पलेस होने की बजाए अपना खाना कैसे बनाएं? अपने घर में मौजूद होम सर्वेट, गार्डनर, ड्राइवर से कैसे बातचीत करें?

क्या आपका बच्चा इन सभी बातों के बारे में जानता है, अगर नहीं तो वो सिर्फ एकेडमिक लर्निंग तो कर रहा है लेकिन रियल लाइफ एक्सपीरियंस से रूबरू नहीं हो रहा है। स्कूलों में भी को-करिकुलर एक्टिविटी के दौरान आर्ट एंड क्राफ्ट पर ज़्यादा फोकस होता है लेकिन लाइफ स्कूल में 7 से 16 साल के बच्चों को एक्सपीरियंशल लर्निंग के माध्यम से रियल लाइफ एक्सपीरियंस के बारे में सिखाया जाता है।

लर्निंग एक्सपीरियंस के गैप को किया आइडेंटिफाई

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी, बेंगलुरू से एमए इन एजुकेशन कम्प्लीट करने के बाद 24 साल की पियुली घोष ने अपने पापा प्रदीप घोष की मदद से जुलाई 2018 में 'लाइफ स्कूल' का कॉन्सेप्ट तैयार किया। पियुली बताती हैं कि हमने देखा कि अपर मीडियम क्लास की फैमिली से ताल्लुक रखने वाले बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ते हैं लेकिन इसके बावजूद भी जब उन्हें रियल वल्र्ड में चीजों का सामना करना पड़ता है तो वो नहीं कर पाते हैं। हमने इस गैप का आइडेंटिफाई किया और पाया कि स्कूलों में एकेडमिक, स्पोर्ट्स, आर्ट को लेकर तो काम हो रहा है लेकिन रियल लाइफ एक्सपीरियंस पर कोई फोकस ही नहीं है। वहीं इस बीच हम कई ऐसे पेरेंट्स से भी मिले जो ऑल्टरनेटिव एजुकेशन को एक्सप्लोर करना चाह रहे थे।

लिहाजा हमने एक करिकुलम तैयार किया और 35 स्कूली बच्चों के साथ लाइफ स्कूल की शुरुआत की। जहां हमने उन्हें सस्टेनेंस स्किल, सिविक स्किल, बिहेबियर एंड पर्सनैलिटी स्किल के बारे में लाइव एक्सपीरियंस के माध्यम से बताया। इसके चलते बच्चों में जो बदलाव देखने को मिले उसके बाद हमने लाइफ स्कूल को वीकेंड ओपन लर्निंग स्पेस की शक्ल दी। जिसके तहत अब हर वीकेंड सिटी के अलग-अलग स्पॉट्स पर यह क्लासेज होती हैं।

लाइव एक्सपीरियंस से समझी पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग

पियुली बताती हैं कि एक वीकेंड जब हमें बच्चों को पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग के बारे में बताना था तो हम उन्हें चेतक ब्रिज स्क्वायर ले गए। यह बातें सिर्फ बताने या पढ़ाने से नहीं हो सकती हैं, इसका अनुभव होना बहुत जरूरी है। हमने देखा कि ज़्यादातर बच्चे ऐसे थे जिन्होंने 16 साल की उम्र में भी कभी रोड क्रॉस नहीं किया था। दरअसल, अपर मीडियम क्लास फैमिली में बच्चे प्रोटेक्टिव एनवायरमेंट में रहते हैं और रियल लाइफ एक्सपीरियंस से रूबरू नहीं हो पाते हैं।

बच्चों ने सबसे पहले वहां आने-जाने वाले लोगों को ऑब्जर्व किया कि वे कैसे रोड क्रॉस कर रहे हैं। फिर हमने उन्हें पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग के बारे में बताया और बच्चों ने रोड क्रॉस करना सीखा। पियुली बताती हैं कि किसी भी स्कूल कैंपस में एक्सपीरिएंशल लर्निंग मुश्किल होती है, इसलिए हम इसे अलग-अलग स्पेस पर करते हैं।

Published on:
25 Mar 2019 10:41 pm
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