लोकायुक्त की टीम ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। जिसमें रिश्वत की राशि तो बहुत कम है, लेकिन जिस व्यक्ति को इस मामले में पकड़ा है उसका पद बहुत बड़ा है। ऐसे में पूरे शहर में इस कार्रवाई की चर्चा चल पड़ी, लोग यह तक कहते नजर आए कि जब मैनेजर लेवल के लोग 10-10 हजार रुपए की रिश्वत लेंगे, तो वे खुद कैसे भ्रष्टाचार को रोक पाएंगे।

मध्यप्रदेश में एक बड़ा अफसर रिटायर होने से पहले चंद रुपयों की रिश्वत लेते धराया है, आरोपी ने महज वेयर हाउस का किराया जमा करवाने के नाम पर रिश्वत मांगी थी। हैरानी की बात तो यह है कि रिश्वत लेने वाला कोई और नहीं बल्कि खुद वेयर हाउस कार्पोरेशन का रीजनल मैनेजर है, जो चंद माह बाद ही रिटायर होने वाला है।
मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में लोकायुक्त की टीम ने फरियादी की शिकायत पर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए रीजनल मैनेजर को रंगे हाथों पकड़ा है, आरोपी का नाम संदीप बिसारिया है जिसने वेयर हाउस संचालक से रिश्वत मांगी थी, क्योंकि उसने पिछले कुछ माह से किराया नहीं भरा था, उसी किराये को भराने के नाम पर ये रिश्वत मांगी थी।
जबलपुर जिले में स्थित बरेला में वेयर हाउस संचालक अमित सिंह ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि एमपी वेयर हाउस कार्पोरेशन का रीजनल मैनेजर दस हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है, इस शिकायत पर लोकायुक्त एसपी संजय साहू के मार्गदर्शन में टीम ने मामले को ट्रेप करने की योजना बनाई, अमित ने बताया था कि वेयर हाउस का करीब 10 से 12 माह का किराया जमा नहीं हुआ है, इस किराए का भुगतान कराने के लिए उसने रीजनल मैनेजर से संपर्क किया तो उसने इस काम को करवाने के नाम पर 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी।
लोकायुक्त की टीम पूरी योजना के साथ पहले से तय की गई रिश्वत की रकम को लेकर रीजनल मैनेजर के कृषि उपज मंडी स्थित ऑफिस पर पहुंची, जहां फरियादी ने रीजनल मैनेजर संदीप बिसारिया को 10 हजार रुपए की रिश्वत दी, तभी टीम ने धर दबोचा।