भोपाल

लंग ट्रांसप्लांट के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं, AIIMS भोपाल के डॉक्टर्स ने सीख ली आधुनिक तकनीक

Lung Transplant : एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने अमेरिका में सीखी फेफड़ा प्रत्यारोपण की आधुनिक तकनीक, ताकि मध्य प्रदेश के मरीजों को देश के बड़े शहरों के साथ साथ जटिल परिस्थिति में विदेश तक जाने की जरूरत न पड़े।
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Lung Transplant
Lung Transplant (AIIMS भोपाल में लंग ट्रांसप्लांट Photo Source- Patrika)

AIIMS Bhopal :मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित एम्स भोपाल में अब लंग ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने और गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज देने का रास्ता साफ हो गया है। एम्स को पहले ही फेफड़ा प्रत्यारोपण की सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिल चुकी है। डॉक्टरों ने अमेरिका में फेफड़ा प्रत्यारोपण की आधुनिक तकनीक सीखी है, जिससे प्रदेश के मरीजों को बड़ा फायदा मिलेगा।

एम्स भोपाल के कार्डियो थोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विक्रम वट्टी ने अमेरिका के प्रतिष्ठित वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर से फेफड़ा प्रत्यारोपण का ये प्रशिक्षण पूरा किया है। ये प्रशिक्षण इसलिए अहम माना जा रहा है ताकि, अस्पताल में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लंग ट्रांसप्लांट की पूरी व्यवस्था विकसित की जा सके।

विदेशों या बड़े शहर जाने की जरूरत नहीं

कई मरीजों को ऐसे इलाज के लिए दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद या फिर विदेशों तक इलाज के लिए रुख करना पड़ता था। भविष्य में ये सुविधा भोपाल में उपलब्ध होने से मरीजों का समय, खर्च और परेशानी तीनों कम होंगे।

सफलतापूर्वक प्रशिक्षण हुआ

प्रशिक्षण के दौरान अंग प्राप्त करने की प्रक्रिया, मरीजों का चयन, प्रत्यारोपण सर्जरी, ऑपरेशन में अपनाई जाने वाली तकनीकें, विशेषज्ञों के समन्वय और ऑपरेशन के बाद मरीजों की देखभाल जैसे विषय शामिल रहे। ये प्रशिक्षण विश्व प्रसिद्ध फेफड़ा प्रत्यारोपण विशेषज्ञ प्रो. डॉ. कोनराड होएट्सेनेकर के मार्गदर्शन में हुआ।

खास बातें

-एम्स में क्वालिटी मैनेजर सर्टिफिकेशन
-एम्स को मिलीं 6.2 करोड़ की अत्याधुनिक मशीनें
-एम्स में अब और आसान होंगी जटिल सर्जरी, 6.2 करोड़ की आधुनिक मशीनें
-मरीजों को राहत: एम्स में लंग्स ट्रांसप्लांट का रास्ता आसान, 6.2 करोड़ से आई नई मशीनें
-सीएसआर से एम्स को मिली 6.2 करोड़ की मशीनें, हृदय यूरोलॉजी इलाज होगा मजबूत
-एम्स के हृदय और यूरोलॉजी विभाग में आई 6.2 करोड़ रुपए की मशीनें
-एम्स में 123 कर्मचारी बने क्वालिटी मैनेजर
-एम्स: क्वालिटी मैनेजर सर्टिफिकेशन आयोजित
-एम्स में 123 प्रतिभागी बने क्वालिटी मैनेजर
-रेटिना बताएगी दिमाग की बीमारी का राज, एम्स भोपाल के शोध में खुलासा
-एम्स भोपाल का आने वाला स्मार्ट नेविगेशन एप मरीज़ों को सीधे उनकी मंज़िल तक पहुंचाएगा।

Published on:
27 Jun 2026 09:44 am