परफार्मेंस बिगड़ी तो जाएगी सरकारी नौकरी।
भोपाल/ मध्य प्रदेश सरकार अब सरकारी नौकरी में लापरवाही, अनियमितता, भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते की योजना बना रही है। इकसे तहत अपने परफॉर्मेंस में इनमें से किस भी तरह की अनियमित्ता पाए जाने पर सेवामुक्त करने का प्रावधान है। सरकार एक बार फिर 20:50 फॉर्मूले पर सख्त हो गई है। यानी जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के CR नंबर 50 से कम हैं, उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। कुल मिलाकर इस फैसले के बाद सरकार का मानना है कि, सिर्फ वही सरकारी अधिकारी या कर्मचारी नौकरी कर सकेंगे, जो अपना बेस्ट परफार्मेंस देने में सक्षम होंगे।
4 दिसंबर तक देनी होगी जानकारी
इसके अलावा सरकार उन अधिकारी और कर्मचारियों के लिए भी एक्शन लेने की तैयारी में है, जो मेडिकली अनफिट हैं, साथ ही इलाज के बावजूद भी बार-बार बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे कर्मचारियों का भी 15 दिसंबर के बाद चेकअप कराया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों के पास 20 साल की नौकरी के बाद खुद रिटायरमेंट लेने का ऑप्शन दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों, निगम-मंडलों, संभागीय आयुक्तों और कलेक्टरों को पत्र भेजकर इस संबंध में 4 दिसंबर तक जानकारी देने के को कहा गया है।
7 दिसंबर को शिवराज करेंगे कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस
बता दें कि, इससे पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ये साफ कर चुके हैं कि, अधिकारियों और कर्मचारियों की फील्ड पोस्टिंग उनके परफॉर्मेंस के आधार पर ही की जाएगी। इस संबंध में एक बार फिर 7 दिसंबर को मुख्यमंत्री चौहान कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इससे पहले सामान्य प्रशासन विभाग ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी जुटा लेगा, जो इस नियम के तहत कार्य करने में सक्षम नहीं या फिट नही हैं।
इस तरह होगी CR गणना
इस नियम के अनुसार गणना करने के लिए अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं। (क) श्रेणी के 5 नंबर, (ख) श्रेणी के 4 नंबर, (ग) श्रेणी के 3 नंबर और (घ) श्रेणी को 2 नंबर दिये जाएंगे। अगर किसी कर्मचारी को हर साल (क) श्रेणी के नंबर मिलते हैं तो 20 साल की सेवा में उन्हें 100 नंबर प्राप्त होंगे।, यानी उनकी आगामी सरकारी सेवा सुरक्षित है।। वहीं, (ग) और (घ) श्रेणी में आने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की सरकारी सेवाओं पर संकट आ सकता है।
जानिए 20:50 के फार्मूले के बारे में
केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी नियमावली के अनुसार, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की सरकारी नौकरी के 20 साल पूरे हो चुके हैं या उनकी उम्र 50 साल से ज्यादा हो चुकी है। ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों का सर्विस रिकार्ड (सीआर) जांचा जाएगा। जांच में अगर उनका परफार्मेंस रिकॉर्ड मापदंडों के अनुरूप नहीं आता, तो उन्हें वीआरएस दे दिया जाएगा। इसके साथ ये भी पऱका जाएगा कि, वो मेडिकली फिट भी है या नहीं।