
भोपाल। पृथ्वी पर स्वर्ग है तो वो कश्मीर माना जाता है, लेकिन वन्यजीवों का स्वर्ग आज मध्यप्रदेश बन चुका है। यह टाइगर स्टेट, लेपर्ड स्टेट, चीता स्टेट, भेड़िया स्टेट, घड़ियाल स्टेट के साथ ही 'वल्चर स्टेट' भी है। इन गिद्धों का कुनबा भी बढ़ने लगा है, जल्द ही भोपाल से 12 गिद्धों को बुंदेलखंड में छोड़ा जाएगा। वाइल्ड लाइन के कारण मध्यप्रदेश देश-दुनिया के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
पत्रिका.कॉम पर प्रस्तुत है मध्यप्रदेश के वन्यजीवों पर एक रिपोर्ट...। इन वन्य जीवों ने मध्यप्रदेश का बढ़ाया मान...।
टाइगर स्टेट (Tiger state)
देश में बाघों की संख्या के हिसाब से यहां 526 बाघ थे। इसके बाद हालांकि कुछ बाघों की मौत भी हो गई, लेकिन कुछ बाघ बढ़ भी गए। फिलहाल मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट बना हुआ है।मध्यप्रदेश के सतपुड़ा, पन्ना, पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिजर्व, रातापानी अभ्यारण में टाइगर हैं।
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तेंदुआ स्टेट (leopard state)
मध्यप्रदेश तेंदुओं की संख्या के हिसाब से भी तेंदुआ स्टेट है। कैट प्रजाति के तेंदुआ को बेहद चालाक जानवर माना जाता है। मध्यप्रदेश में इनकी संख्या 3427 के करीब है। तेंदुआ मध्यप्रदेश के लगभग सभी अभ्यारण में मौजूद हैं। जंगल सफारी पर जाने वाले कई वन्य जीव प्रेमियों को यह नजर आते रहते हैं।
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चीता स्टेट (cheetah state)
हाल ही में मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में हाल ही में नामीबिया से चीता लाए गए। यह भारत में पहला राज्य हैं जहां चीता मौजूद हैं। थोड़े दिनों बाद दक्षिण अफ्रीका से भी 12 चीता लाए जाने वाले हैं। पीएम मोदी ने इन चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था।
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भेड़िया स्टेट (wolf state)
मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 772 भेड़िए भी हैं। इसलिए मध्यप्रदेश भेड़िया स्टेट भी है। दूसरे नंबर पर राजस्थान का नंबर है, जहां 532 भेड़िए हैं। इनके लिए मध्यप्रदेश की आबोहवा भी बेहतर है, इसलिए इनकी यहां तादाद काफी ज्यादा है।
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घड़ियाल स्टेट (gharial state)
मध्यप्रदेश अब घड़ियाल स्टेट भी है। चंबल नदी पर बने घड़ियाल अभ्यारण्य में घड़ियालों की संख्या बेतहाशा है। अकेले चंबल नदी में ही 1255 घड़ियाल हैं।
चार दशक पहले घड़ियालों की संख्या खत्म होने की कगार पर पहुंच गई थी। तब दुनिया में केवल दो सौ घड़ियाल ही बचे थे। इनमें से पूरे भारत में 96 और चंबल नदी में 46 घड़ियाल ही बचे थे।
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वल्चर स्टेट (vulture state)
दुनियाभर में लुप्त हो रही गिद्धों की प्रजाति सिर्फ भारत में बची है। इसमें भी मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा संख्या है। भोपाल के केरवा स्थित प्रजनन केंद्र में इनका सेंटर है। यहां पहले चरण में 12 गिद्धों को छोड़ने के लिए मैदानी स्तर पर काम चल रहा है। वर्तमान में यहां 60 गिद्ध हैं। इनमें 41 लांग बिल्ड वल्चर (लंबी चोंच वाले गिद्ध) और 19 वाइट बैक्ड वल्चर (सफेद पीठ वाले गिद्ध) हैं। भोपाल के केरवा स्थित प्रजनन केंद्र से बुंदेलखंड में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के विज्ञानी और वालंटियर्स ने बुंदेलखंड के पांच जिलों सागर, दमोह, टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर में छोड़ा जाएगा।
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