भोपाल

बर्ड एस्टिमेशन ने खोला राज… एमपी के ये जलाशय अब सिर्फ दरिया नहीं… लाइफलाइन भी

MP News: बर्ड लवर्स को उत्साह से भर देने वाला रहा बर्ड एस्टिमेशन 2026, पहला सुरक्षित और मनपसंद वेटलैंड ठिकाना जबलपुर, दूसरे पर भोपाल का नाम...

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Feb 09, 2026
MP news

MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और पूरे प्रदेश के जलाशय अब केवल लोगों की प्यास बुझाने वाले दरिया नहीं रहे, बल्कि ये ऐसे वेटलैंड बन गए हैं जो परिंदों के लिए सुरक्षित मनपसंद ठिकाने बन रहे हैं। हालिया जलपक्षी एस्टिमेशन ने इस बदलाव की तस्वीर को साफ कर दिया है। बर्ड लवर्स को उत्साह से भर देने वाला ये एस्टिमेशन कहता है कि संस्कारधानी जबलपुर में इस बार सबसे ज्यादा जलपक्षी मोहरी पांड में दर्ज किए गए हैं। वहीं राजधानी भोपाल का भोज वेटलैंड प्रदेश में दूसरे पायदान पर रहा है। इसे बड़ा संकेत माना जा रहा है कि शहर के इलाकों के आसपास मौजूद जलस्रोत भी जैव विविधता के लिए उतने ही अहम हैं, जितने जंगलों के अंदर के जलाशय।

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यहां डिफ्रेंट प्रजातियों ने किया अट्रैक्ट

कुल एस्टिमेशन में भले ही भोज वेटलैंड दूसरे स्थान पर है, लेकिन डिफ्रेंट-डिफ्रेंट प्रजातियों की विविधता के मामले में बिशनखेड़ी क्षेत्र ने बेहद खास पहचान बनाई है। यहां 129 प्रकार की प्रजातियों के जल पक्षी देखे गए हैं। यह दर्शाता है कि इन पक्षियों के लिए वेटलैंड होना ही काफी नहीं, बल्कि इनका सुरक्षित और अनुकूल होना भी मायने रखता है।

विदेशी मेहमानों की मौजूदगी भी बढ़ी

इस बार के जलपक्षी एस्टिमेशन में देशी परिंदों के साथ ही प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियां भी दर्ज की गई हैं। साइबेरियन और यूरोपीय इलाकों से आने वाले पक्षियों की उपस्थिति इस ओर इशारा करती है कि प्रदेश के ये वेटलैंड्स अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन रूट मैप पर भी अपनी अलग जगह बना रहे हैं।

एस्टिमेशन के आंकड़े बताते हैं कि शहरी विस्तार के बीच ये झीलें और डेम अगर संरक्षित रहें, तो वे पक्षियों के विए बड़े जंगलों का विकल्प बनकर उभरेंगे। विशेष रूप से भोपाल जैसे शहरों में जहां कलियासोत, हलाली और भोजताल जैसे जलाशय लगातार दबाव झेल रहे हैं।

यानी संरक्षण नहीं किया तो इनकी संख्या भी नहीं दिखेगी

वेटलैंड एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पक्षियों की बढ़ती संख्या एक चेतावनी भी है कि यदि इन पर अतिक्रमण, गंदगी या अनियंत्रित गतिविधिया बढ़ती हैं, तो यह तस्वीर जल्द ही धूमिल हो जाएगी। जलपक्षियों के एस्टिमेशन ने यह साबित कर दिया है कि जलाशयों की सेहत रहेगी तो ही जैव विविधता की सेहत तंदुरुस्त रहेगी।

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Updated on:
09 Feb 2026 02:58 pm
Published on:
09 Feb 2026 02:54 pm
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