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एमपी के ’55 जिलों’ में फोर्स मूवमेंट बनाने के निर्देश, GIS मैप पर दर्ज की बस्तियां

MP News: पुलिस ने 19 जिलों की संवेदनशील गलियों व बस्तियों को जीआइएस मैप पर दर्ज कर लिया है।

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force movements प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

MP News: कानून व्यवस्था बिगड़ी तो प्रदेश की 1314 बस्तियों व गलियों में पुलिस व किसी भी तरह की फोर्स नियंत्रण के लिए आसानी से दाखिल नहीं हो सकती। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि पुलिस खुद मान रही है। इन बस्तियों की पहचान पुलिस ने ही की है। किसी भी तरह की संभावित विपरित स्थिति में यहां दाखिल करने के लिए पुलिस को जोनल प्लान बनाने हैं। यह काम प्रदेश के 25 जिलों ने पूरा कर लिया है, बाकी के जिले पिछड़े हैं।

असल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीन महीने पहले पुलिस को जिलों की ऐसी संकरी बस्तियों व गलियों की पहचान करने के लिए कहा था, जहां पूर्व में कानूनू व्यवस्था की दृष्टि से कभी न कभी अप्रिय स्थिति बनी हो। इसके आधार पर जोनल प्लान बनाने को भी कहा था। पुलिस इसके बाद ही ऐसी बस्तियों व गलियों की पहचान कर रही है। दरअसल, ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ने पर तंग बस्तियों तक पकड़ बनाने में पुलिस को भी मशक्कत करनी पड़ती है।

जीआइएस मैप पर दर्ज की बस्तियां

पुलिस ने 19 जिलों की संवेदनशील गलियों व बस्तियों को जीआइएस मैप पर दर्ज कर लिया है। 23 जिलों में एक्सेस प्लान तैयार हैं। पुलिस का कहना है कि पीएचक्यू और गृह विभाग से जो निर्देश मिले थे, उसके तहत काम कर रहे हैं। किसी भी स्थिति में कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसके प्रयास हो रहे हैं।

त्योहार में कानून व्यवस्था बनाना बड़ी चुनौती

त्योहारों के समय कई जिलों में पुलिस के लिए कानून व्यवस्था को बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। कहीं न कहीं सरकार भी इस बात को लेकर चिंता करती रही है। कानून मामलों के जानकारों का कहना है कि जहां आवागमन आसान हो, वहां कानून व्यवस्था पर कम से कम समय में नियंत्रण पाना आसान है, लेकिन संकरी बस्तियों व गलियों में पहुंच बनाना मुश्किल है, इसलिए सरकार का इस दिशा में सोचना और काम करना जरूरी है।

पुलिस की मौजूदगी आम लोगों के बीच हो, जनता और पुलिस का सीधा संवाद बना रहे, मुखबिरी तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो, इन मुद्दों पर पुलिस और सरकार पूरी तरह फोकस कर रही है।