महालक्ष्मी का विसर्जन नहीं किया जाता है, बल्कि एक ही प्रतिमा की परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी पूजा-अर्चना की जाती है।
भोपाल। महाराष्ट्रीयन समाज का ढाई दिवसीय महालक्ष्मी उत्सव मंगलवार से शुरू होगा। इस मौके पर शहर में रह रहे महाराष्ट्रीयन परिवारों में ज्येष्ठा और कनिष्ठा स्वरूप में महालक्ष्मी की स्थापना होगी और पूजा-अर्चना की जाएगी। इसी प्रकार बुधवार को महालक्ष्मी को आंबिल के विशेष महाप्रसाद सहित और विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। गुरुवार को विदाई होगी। शहर में निवासरत महाराष्ट्रीयन परिवारों में इस उत्सव की तैयारियां पूरी हो गई हैं,। महालक्ष्मी के आगमन के पूर्व घरों में आकर्षक झांकी सजाई जा रही है, साथ ही विद्युत साज-सज्जा की गई है।
परम्परा अनुसार ढाई दिन के लिए महालक्ष्मी नामक दो बहनें अपने बच्चों के साथ मायके पहुंचती हैं। सप्तमी और अनुराधा नक्षत्र में उनकी स्थापना की जाती है, ढाई दिन तक मायके में रहने के बाद नवमी के दिन महालक्ष्मी की विदाई होती है। इस दौरान सुख-समृद्धि की कामना के साथ उनकी पूजा-अर्चना की जाती है, और घरों में उत्साह का वातावरण रहता है। पंडित नितिन अवसरकर ने बताया कि महालक्ष्मी का आगमन अनुराधा नक्षत्र में होता है, जो मंगलवार को विद्यमान रहेगा, इसलिए मंगलवार को महालक्ष्मी का आगमन होगा। इसी तरह ज्येष्ठा नक्षत्र में भोग लगता है और मूल नक्षत्र में विदाई होती है। उत्सव का समापन गुरुवार को होगा।
महालक्ष्मी को स्थापना के अगले दिन विशेष प्रसाद आंबिल का भोग लगाया जाता है। आंबिल ज्वार के आटे और छाछ से तैयार की जाती है। यह विशेष प्रसाद माना जाता है। इसी प्रकार अलग-अलग तरह की 16 प्रकार की सब्जियां, पूरनपोली आदि का भी भोग लगाते हैं।
पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है एक ही प्रतिमा
महालक्ष्मी का विसर्जन नहीं किया जाता है, बल्कि एक ही प्रतिमा की परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी पूजा-अर्चना की जाती है। इसके लिए प्रतिमाओं के मुखौटे अलग से रहते हैं। जब स्थापना की जाती है, तो यह मुखौटे निकाले जाते हैं, और लोहे से बने पायली (ढाचा) पर कपड़े से बने हाथ, अथवा कपड़े से बना धड़ लगाते हैं। इसके बाद इस पर मुखौटा लगाते हैं, और उसे साड़ी पहनाई जाती है।
कंठाली मंदिर में मनेगी राधाअष्टमी
कंठाली देवी मंदिर में गहोई वैश्य पंचायत की ओर से मंगलवार को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। भोपाल पंचायत के अध्यक्ष दिनेश नोगरैया ने बताया कि हर साल समाजजन गोपा अष्टमी धूमधाम से मनाते हैं। 29 अगस्त को मंदिर में पूजन सुबह 10 बजे शुरू होगा। पूजन के बाद भजन गायन होगा।