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मेनका गांधी को बड़ा झटका, हाथ से निकली 522 एकड़ बेशकीमती पुश्तैनी जमीन, मां ने छोड़ दिया दावा

Maneka Gandhi Loses Land -हाईकोर्ट के निर्णय के बाद एक्टिव हुए भोपाल के अधिकारी, 51 साल पुरानी पुश्तैनी जमीन की जंग खत्म, मेनका गांधी और उनकी बहन को भारी पड़ा मां द्वारा दावा छोड़ना
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Maneka Gandhi loses 522 acres of prime ancestral land

मेनका गांधी - Image Social Media

Maneka Gandhi - पूर्व प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी के पुत्र स्वर्गीय संजय गांधी की पत्नी, बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को बड़ा झटका लगा है। उनके हाथ से अरबों रुपए कीमत की जमीन निकल गई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्णय के बाद यह स्थिति बनी है। कोर्ट ने भोपाल की पुश्तैनी जमीन को लेकर भाजपा नेता मेनका गांधी और उनकी बहन अंबिका शुक्ला की कानूनी लड़ाई को विराम दे दिया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस संबंध में दोनों की अपील निरस्त कर दी। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद जहां उनके रिश्ते के भाई वीएम सिंह का जमीन पर कब्जे का रास्ता क्लियर हो गया वहीं फैसले के परिपालन में भोपाल के राजस्व अधिकारी भी एक्टिव हो गए हैं। इसी के साथ 51 साल पुरानी पुश्तैनी जमीन की जंग खत्म हो गई है। मेनका को उनकी मां द्वारा जमीन व अन्य संपत्तियों से स्वयं और वारिसानों का हक त्यागना महंगा पड़ा। इस वजह से वे कानूनी जंग हार गईं।

जमीन का यह मामला भोपाल के बहेटा, बोरबन और लाऊखेड़ी क्षेत्र की 522 एकड़ जमीन से जुड़ा है। इस विवाद की शुरुआत 1975 में दिल्ली हाईकोर्ट में दायर विभाजन वाद से हुई थी। बाद में पारिवारिक समझौते पर 1993 में दिल्ली हाईकोर्ट ने डिक्री पारित की। इसे मेनका ने चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा।

राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने का विवाद

इसके बाद राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने का विवाद जारी रहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया, समझौते के बाद अपीलकर्ताओं के अधिकार समाप्त हो चुके थे। एसीजे विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मेनका गांधी और उनकी बहन की रिट अपील निरस्त करते हुए वीएम सिंह के नाम विवादित स्पत्ति के नामांतरण का रास्ता साफ कर दिया।

बीजेपी नेत्री मेनका गांधी और उनकी बहन ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि भोपाल की हुजूर तहसील के अंतर्गत लाऊखेड़ी की जमीन पर उनके रिश्ते के भाई वीएम सिंह ने उन्हें जानकारी दिए बिना ही पूर्व में हाईकोर्ट से नामांतरण करवाने का एक आदेश कराया। उन्होंने हमें पक्षकार नहीं बनाया।

जमीनें वीएम सिंह के नाम ही कर दी

वीएम सिंह ने कहा कि मेनका गांधी अनावश्यक आपत्ति लगा रही हैं। उनकी मां अमतेश्वर की जिन आपत्तियों को सुप्रीम कोर्ट निरस्त कर चुकी है पुनः वही आपत्ति लगाई गई है। वीएम सिंह ने बताया कि मेनका की मां ने मध्यप्रदेश की सभी पुश्तैनी जमीनों व संपत्तियों से खुद का और वारिसों का हक त्याग दिया था। जमीनें वीएम सिंह के नाम ही कर दी थीं।