जमीन का यह मामला भोपाल के बहेटा, बोरबन और लाऊखेड़ी क्षेत्र की 522 एकड़ जमीन से जुड़ा है। इस विवाद की शुरुआत 1975 में दिल्ली हाईकोर्ट में दायर विभाजन वाद से हुई थी। बाद में पारिवारिक समझौते पर 1993 में दिल्ली हाईकोर्ट ने डिक्री पारित की। इसे मेनका ने चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा।