Indian Judiciary: देश की न्यायिक व्यवस्था को आमजन के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की राष्ट्रीय बैठक में अदालतों के डिजिटल सिस्टम को बहुभाषी बनाने पर सहमति बनी है।
MP News: आमजन को उनकी अपनी भाषा में न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में देश की न्यायपालिका बड़ा कदम उठाने जा रही है। भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (National Judicial Academy) में आयोजित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में बहुभाषी डिजिटल ज्यूडिशियल प्लेटफॉर्म (Multilingual digital platform) विकसित करने पर सहमति बनी।
सम्मेलन की अगुवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों ने की। मंथन के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि देश की बड़ी आबादी भाषा संबंधी बाधाओं के कारण न्यायिक प्रक्रिया से पूरी तरह जुड़ नहीं पाती। इसे दूर करने के लिए अदालतों के डिजिटल सिस्टम को बहुभाषी बनाया जाएगा, ताकि याचिकाकर्ता केस से जुड़ी जानकारी, आदेश, नोटिस और सुनवाई विवरण अपनी मातृभाषा में समझ सकें।
मुख्य न्यायाधीशों ने यूनिफाइड, एफिशिएंट और पीपुल-सेंट्रिक ज्यूडिशियरी के विजन के तहत न्याय को भाषाई व भौगोलिक सीमाओं से मुक्त करने का संकल्प लिया। यह पहल न्यायपालिका को लोगों के करीब और सुलभ न्याय की अवधारणा को मजबूत करेगी।
सम्मेलन में माना गया कि तकनीक के समुचित उपयोग से न्यायिक प्रक्रियाएं न सिर्फ पारदर्शी होंगी, बल्कि आमजन का भरोसा भी बढ़ेगा। वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली को भी बहुभाषी डिजिटल सपोर्ट से जोड़ा जाएगा, ताकि छोटे मामलों का त्वरित समाधान हो सके।