
भोपाल. शहर में कुछ लोगों को विंटेज कार कलेक्शन का शौक है। इनके पास पुरानी कारों का नायाब क्लेक्शन है। हालांकि ये कारें कुछ खास मौकों पर ही दिखाई देती हैं क्योंकि ये दिखने में जितनी खूबसूरत हैं, इनकी देखभाल भी उतनी ही नजाकत से करनी होती है। कई विंटेज कारें ऐसी हैं, जिनके रखरखाव में ही इतना खर्च होता है जितने में नई कार ली जा सकती है पर विंटेज कार के मुरीदों को यह मंजूर नहीं.
इन गाडियों के पार्ट्स भी आसानी से नहीं मिलते, कई पार्ट्स दिल्ली-मुंबई से बुलाने पड़ते हैं। कई बार तो विदेशों से भी एक्सपोर्ट करने पड़ते हैं। इन्हें महीने में एक बार जरूर ऑन रोड किया जाता हैै, जिससे इनकी स्थिति का पता चलता रहे। पुरानी कारों के शौकीन फैज मोहम्मद ने बताया कि मेरे दादा के पास उस जमाने में जीप हुआ करती थी। वे हमेशा कहते कि घर में यूनिक कार होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि उनको देखते हुए मुझे भी विंटेज कार सहेजने का शौक लगा। अभी मेरे पास 5 विंटेज कारें हैं। इनमें से तीन को पूरी तरह से तैयार किया गया है। मेरे कलेक्शन में 1928 से 1962 तक की कारें हैं। 1942 की ‘ओस्टिल ए 15’ कार खरीदी थी तो ये काफी खराब स्थिति में थी। इसे फिर से पुराना रूप दिया गया। वर्ष 1939 की 'प्री फ्यू 4’ को भी ओरिजनल लुक दिया गया है।
फैज मोहम्मद बताते हैं कि एक कार के पिस्टन यहां नहीं मिल पा रहे थे, इन्हें आइसलैंड से मंगाया है। अभी इसका काम चल रहा है। विंटेज कार चलाने का अपना अलग ही मजा है। आप जहां मौजूद होते हैं, सभी के बीच सेंटर ऑफ अट्रैक्शन होते हैं। इनकी एसेसरीज के लिए ऐसे लोगों से संपर्क करते हैं, जिसके पास 70 से 80 साल पुरानी गाड़ी होती है। कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि लकड़ी पर डिजाइन को तैयार किया गया और इसके बाद उस डिजाइन पर काम किया गया।