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जंगल ही नहीं, जीन भी टूट रहे हैं! वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता क्यों बनी जेनेटिक विविधता?

Wildlife Corridor Genetic Diversity: वैज्ञानिक अब वन्यजीवों के संरक्षण की खुशी का जश्न नहीं मनाना चाहते, संरक्षण के साथ ही इनके अस्तित्व को बचाने जेनेटिक डायवर्सिटी के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले वाइल्डलाइफ कॉरिडोर और लैंडस्केप को बचाने की दिशा में प्रभावी कदम बढ़ाना चाहते हैं... टूटती सरहद में पढ़ें वाइल्डलाइफ वैज्ञानिकों की बड़ी चिंता....
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Wildlife corridors genetic diversity

Wildlife corridors genetic diversity: ह्यूमन इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष, खंडित होते वाइल्डलाइफ कॉरिडोर्स से इतर वैज्ञानिको को नई चिंता। (photo: AI Generated)

Wildlife Corridor Genetic Diversity: वन्यजीवों के बेहतर और सुरक्षित संरक्षण का ही नतीजा है कि वन्यजीवों की आबादी लगातार बढ़ रही है। इनकी आबादी का बढ़ना सुखद है, लेकिन इस बढ़ती आबादी ने वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। उन्हें चिंता है कि भविष्य में क्या ये वन्यजीव नया जंगल, नये साथी और नई जेनेटिक विवधता तलाश पाएंगे? इंसानी आबादी और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष या इनके सहअस्तित्व से ज्यादा वैज्ञानिक अब चिंतित हैं कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास टूट रहे हैं। ऐसे में कहीं अगली पीढ़ियां जेनेटिक (Wildlife Corridor Genetic DiversityCrisis) रूप से कमजोर तो नहीं हो जाएंगी? वाइल्डलाइफ कॉरिडोर्स और लैंडस्केप कनेक्टिविटी जैसे विषयों में ही वैज्ञानिकों के इस सवाल का जवाब छिपा है, इन्हीं पर अब वन्यजीव संरक्षण से कहीं ज्यादा फोकस करने की जरूरत समझी जा रही है।

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