
बस्तर बना मातृभाषा शिक्षा का मॉडल (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Education: अगर पहली कक्षा के बच्चे को वही बात उसकी अपनी भाषा में समझाई जाए, जो वह घर में रोज सुनता और बोलता है, तो वह न सिर्फ जल्दी सीखता है, बल्कि पढ़ाई में उसकी रुचि और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में लागू किया गया। मातृभाषा आधारित बहुभाषी शिक्षा (Mother Tongue Based Multilingual Education - MTB-MLE) मॉडल इसी सोच पर आधारित है और अब इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। समग्र शिक्षा, एससीईआरटी और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन द्वारा किए गए संयुक्त सर्वेक्षण में सामने आया कि प्रदेश के 75 प्रतिशत बच्चों की सीखने की सबसे बड़ी बाधा शिक्षक या किताबें नहीं, बल्कि भाषा का अंतर था।
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