भोपाल

जानिए सुसाइड करने वालों की मृत्यु के बाद क्या दशा होती है, यहां पढ़ें पूरी खबर

सुसाइड करने वाले लोगों की होती है ये दशा...

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Feb 06, 2018
maut ke baad kya hoga

भोपाल।मध्य प्रदेश में बेरोजगारी, पारिवारिक परेशानियों, दिमागी बीमारियों के कारण आत्महत्या करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। आत्महत्या के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। हाल ही में स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) की ओर से जारी आत्महत्या का यह ग्राफ आपको भी हैरान कर देगा। यहां पिछले 7 महीनों में 5230 लोगों ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। इनमें 441 स्टूडेंट जबकि 818 किसान और लेबर शामिल हैं। प्रदेश में हर साल 10,000 से ज्यादा लोग खुदकुशी कर रहे हैं।

7 दिसंबर 2016 को सरकार ने खुलासा किया कि 1 जुलाई 2016 से 15 नवंबर 2016 के बीच सुइसाइड के 3469 मामले रिपोर्ट हुए। इसमें 531 किसान और 281 स्टूडेंट शामिल हैं।' 16 नवंबर 2016 से 27 फरवरी 2017 के दौरान सुइसाइड के 1761 मामले सामने आए। इसमें 106 किसान, 181 लेबर हैं। इसके साथ ही पिछले 7 महीनों में आत्महत्या के कुल मामलों की संख्या 5230 तक पहुंच गई।' मध्य प्रदेश पुलिस के अफिशल आंकड़ों के अनुसार 2015 में आत्महत्या के 10293 मामले दर्ज किए गए। इसमें 6294 पुरुष, 3999 महिलाएं , 625 स्टूडेंट और 581 लेबर शामिल थे।

सरकार की आंखें खोल देंगे ये FACT

- वर्ष 2014 में प्रदेश में आत्महत्या के 124 मामले सामने आए। आत्महत्या करने वाले इन 124 मामलों में सभी मामले बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों के थे।

- 2015 में यह आंकड़ा 300 गुना से भी ज्यादा का आंकड़ा पार करते हुए 455 पर आ पहुंचा। जो 2014 के मुकाबले 366 फीसदी ज्यादा है।

- 579 मामलों में से 306 सतना जिले के दर्ज किए गए।

- जबकि भोपाल में 185 मामले सामने आए।

- छतरपुर में आत्महत्या के 22 मामले सामने आए।

- श्रम मंत्रालय की ओर से किए गए सर्वे के मुताबिक मध्यप्रदेश में 15 साल से ज्यादा उम्र के 1000 लोगों में से 29 लोग बेरोजगारी के कारण आत्महत्या कर रहे हैं।

सुसाइड करने वाले इंसान को मिलता है नर्क

यदि हिन्दू धार्मिक ग्रंथों की बात करें तो अपने हाथों अपना जीवन समाप्त करना एक बहुत बड़ा अपराध है। जीवन एवं मृत्यु उस महान परमात्मा के हाथों होता है। लेकिन यदि मनुष्य अपने हठ से स्वयं ही जीवन-मृत्यु की बागडोर पकड़ना चाहे, तो भगवान भी उसे दंड ही देते हैं। इसीलिए आत्महत्या करने वाला इंसान नर्क ही भोगता है। मान्यता है कि पृथ्वी पर जीवन हर किसी को प्रदान नहीं किया जाता। वर्षों की तपस्या के बाद किसी आत्मा को इंसान रूप में पृथ्वी पर आने का मौका मिलता है। नहीं तो बार-बार किसी ना किसी पशु एवं पक्षी, यहां तक कि कीड़े-मकोड़े के रूप में भी पृथ्वी का हिस्सा बनना पड़ता है।

भगवान की मर्जी

यह भगवान की मर्जी है कि वे किसी रूह को इंसानी रूप में पृथ्वी पर भेजते हैं। उनका उस आत्मा को यह मौका देने का उद्देश्य होता है उसे आध्यात्म से जोड़ना। प्रभु चाहते हैं कि वह पृथ्वी लोक पर जाकर महान ग्रंथों को समझे, अच्छे कर्म करे और अपने जीवन से मुक्ति पाकर स्वर्ग लोक में शामिल हो जाए।

मिलती है सजा

जब इंसान भगवान के विरुद्ध चलता है तो उसे सजा मिलती है। यही कारण है कि आत्महत्या करने वाले को नर्क हासिल होता है। माना गया है कि इस पूरे ब्रह्मांड में 14 प्रकार के स्थान हैं जहां मनुष्य रहता है। इनमें से 7 सकारात्मक स्थान हैं तथा बाकी 7 नकारात्मक स्थान हैं, जिन्हें नर्क भी कहा जाता है।

ऐसा होता है नर्क

जब कोई मनुष्य अपना शरीर छोड़ आत्मा रूप धारण कर लेता है तो उसे पृथ्वी के अलावा अन्य 13 स्थानों में से किसी एक स्थान पर भेजा जाता है। इस प्रकार से आत्महत्या करने वाले इंसान को 7 नर्क स्थान में से किसी एक नर्क की दुनिया में भेजा जाता है। उस इंसान को यहां कम से कम 60,000 पृथ्वी के वर्ष समान वर्ष व्यतीत करने होते हैं।

यहां होता है सिर्फ अंधकार

मान्यता है कि नर्क का यह स्थान ऐसा है जहां रोशनी की एक किरण भी नहीं होती। यह एक ऐसा स्थान है जो किसी शिकारी को परिंदे में बांधकर रखने के योग्य लगता है। यहां दुख, पीड़ा और अंधकार के अलावा इंसान को कुछ भी हासिल नहीं होता है।

मरने के बाद नहीं मिलता है सुख

आत्महत्या का फैसला लेने वाला इंसान ना मरने से पहले सुख ले पाता है और ना ही मरने के बाद सुख रहने के लायक रहता है। अपनी जिंदगी के दौरान उसने अनगिनत दुख झेले। यह जरूरी नहीं कि आत्महत्या करने वाला इंसान बुरा था इसीलिए उसे नर्क हासिल हुआ। बल्कि उसने जो भी किया मजबूरी में किया। उसके लिए जीवित आवस्था में दुख झेलने से ज्यादा आसान था मृत्यु को स्वीकार कर लेना। परंतु मृत्यु के बाद उसे क्या हासिल होगा यह वह नहीं जानता।

अपराध है आत्महत्या

कानूनी रूप से भी आत्महत्या एक अपराध है लेकिन हमारा धर्म भी हमें इसकी इजाज़त नहीं देता। आत्महत्या करने वाला भगवान की बनाई सांसारिक नीति के विरुद्ध जब कोई कदम उठाता तो भगवान भी उसे सज़ा देने के लिए तैयार रहते हैं।

Published on:
06 Feb 2018 06:15 pm
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