MBBS- नेशनल मेडिकल कमीशन स्पष्ट कर चुकी है कि प्रवेश की तारीख से 9 साल के भीतर एमबीबीएस कोर्स पूरा करना अनिवार्य है
MBBS- डॉक्टर बनने का सपना लेकर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले कुछ छात्रों की कहानी अब प्रशासनिक उलझनों में उलझ गई है। छात्र दो यूनिवर्सिटी के बीच फंसे हैं। पड़ताल में सामने आया कि 14 साल में डॉक्टरी की पढाई पूरी नहीं कर पाए छात्र एक और चांस मांग रहे हैं। ऐसे करीब 15 छात्र हैं जोकि डेढ़ साल से बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी बीयू और मेडिकल यूनिवर्सिटी के चक्कर काट रहे हैं। सभी छात्र बीयू से संबद्ध मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे थे लेकिन यूनिवर्सिटी ने 2024 के बाद परीक्षाएं लेने से इंकार कर दिया। इधर मेडिकल यूनिवर्सिटी ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि इन छात्रों की परीक्षा जिम्मेदारी पुरानी यूनिवर्सिटी की ही है। नेशनल मेडिकल कमीशन नोटिफिकेशन जारी कर स्पष्ट कर चुकी है कि प्रवेश की तारीख से 9 साल के भीतर एमबीबीएस कोर्स पूरा करना अनिवार्य है।
चित्रकूट निवासी दिलीप त्रिपाठी ने वर्ष 2012 में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था, लेकिन 14 साल बीतने के बाद भी उनकी डिग्री पूरी नहीं हो सकी। स्थिति यह है कि एक विषय में मात्र एक नंबर कम होने के कारण उनका कोर्स अधूरा रह गया। दिलीप बताते हैं कि 2013 में निजी कारणों से उन्हें पढ़ाई से ब्रेक लेना पड़ा था। इसके बाद 2015-16 में उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की और लगातार प्रयास करते रहे। वर्ष 2024 तक उन्होंने परीक्षा भी दी, लेकिन एक विषय में एक अंक कम रह जाने के कारण डिग्री पूरी नहीं हो सकी।
दिलीप का कहना है कि वे हिंदी माध्यम के छात्र रहे हैं, इसलिए मेडिकल की पढ़ाई में उन्हें काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। वे अकेले नहीं हैं। ऐसे करीब 15 छात्र हैं जिनकी एमबीबीएस की पढ़ाई 15 साल में भी पूरी नहीं हो सकी है। इनमें एक छात्रा बीएएमएस की भी शामिल है, जिसकी समस्या भी लगभग यही है।
छात्रों की परेशानी 2014 में मेडिकल यूनिवर्सिटी बनने के बाद और बढ़ गई। इससे पहले ये सभी छात्र बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (बीयू) से संबद्ध मेडिकल कॉलेजों में पढ़ते थे। बीयू ने 2024 तक परीक्षाएं आयोजित कीं, लेकिन अब हाथ खड़े कर दिए हैं। बीयू प्रबंधन का कहना है कि अब परीक्षा मेडिकल यूनिवर्सिटी को करानी चाहिए। वहीं जब छात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी पहुंचे तो वहां से जवाब मिला कि 2014 से पहले प्रवेश लेने वाले छात्रों की ज्मिेदारी पुरानी यूनिवर्सिटी की है। इस वजह से छात्र
पिछले डेढ़ साल से दोनों विश्वविद्यालयों के बीच चक्कर काट रहे हैं।
छात्रों ने अब बीयू के लोकपाल कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है और जल्द परीक्षा कराने की मांग की है। नेशनल मेडिकल कमीशन ने 2023 में नोटिफिकेशन जारी कर स्पष्ट किया कि प्रवेश की तारीख से 9 साल के भीतर एमबीबीएस कोर्स
पूरा करना अनिवार्य होगा। बीयू में ऐसे एमबीबीएस छात्रों की संख्या पहले 56 थी। इनमें सेकंड ईयर के 8, थर्ड ईयर के 20 और फोर्थ ईयर के 28 छात्र शामिल थे। वर्ष 2024 तक अधिकांश छात्रों ने कोर्स पूरा कर लिया, लेकिन करीब 15 छात्र ऐसे हैं जिनका भविष्य अब भी अधर में लटका हुआ है।