
Meenakshi Natrajan Controversy: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के मामले में फॉर्म भरवाने वाले वकील जेपी धनोपिया ट्रोलर्स के निशाने पर हैं। उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म ही गलत भरा, तो कोई कह रहा है कि फॉर्म में मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ आपराधिक मामला होने की जानकारी नहीं दी। ऐसे न जाने कितने सवाल उन पर उठाए जा रहे हैं। अब इस मामले में जेपी धनोपिया ने चुप्पी तोड़ दी है। उनका कहना है कि उन्हें फॉर्म भरने का 23 साल का अनुभव है नामांकन फॉर्म में कोई गलती नहीं की। न ही उन्होंने बताया कि शपथ पत्र में आपराधिक प्रकरण नहीं दिखाया गया है। इसलिए फॉर्म निरस्त किया जा रहा है। यही नहीं उन्होंने यह भी कहा है कि जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म निरस्त किया गया है, असल में वह आपराधिक प्रकरण है ही नहीं।
जेपी धनोपिया ने यह सारा खुलासा मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में किया है। उनका कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के मामले में जहां बीजेपी का आरोप है कि शपथ पत्र में आपराधिक प्रकरण की जानकारी नहीं दी। असल में वह कोई आपराधिक प्रकरण है ही नहीं। वह केवल एक शिकायत पर दिया गया नोटिस है। नोटिस में कोई केस नंबर तक नहीं था। उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति ने उसे दिया वो उसके लिए अधिकृत भी नहीं था। वो तो एक फोटो कॉपी थी। उसमें कहीं नहीं लिखा कि यह कोई आपराधिक प्रकरण है, तो यह अपराध है ही नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को जब लगा कि अब कांग्रेस के विधायक बिकेंगे नहीं। वे अब उनकी बाहर जा रहे हैं, तो अब उनकी पकड़ से बाहर हैं। तब भाजपा ने षडयंत्र रचा और फर्जी तरीके से नामांकन रद्द करवा दिया। उन्होंने जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बनाईं कि फॉर्म लेट हो और सबकुछ उनके ही हाथ में होगा।
धनोपिया का दावा है कि उन्होंने निर्वाचन अधिकारी से समय मांगा कि अगर कोई गलती है, तो सुधार कर दें, या फिर उस नोटिस के लिए जस्टिफिकेशन देने के लिए कि हमने उसकी जानकारी क्यों नहीं दी। निर्वाचन अधिकारी से 11 बजे तक का टाइम मांगा गया। उन्होंने दे भी दिया, लेकिन उनके पीछे एमपी के 2-3 मंत्री बैठे थे, कैलाश विजयवर्गीय, सबनानी थे, राकेश सिंह थे, विष्णुदत्त शर्मा वहां थे। ऐसा लग रहा था जैसे यहां युद्ध हो रहा था। उन्होंने मना कर दिया कि 11 बजे तक का समय नहीं देंगे। उनसे 5 बजे तक का समय मांगा, ताकि कोर्ट से नोटिस की सर्टिफाइड कॉपी ला सकें।
उन्होंने साफ कहा कि भारत में लोकतंत्र की सरेआम आत्महत्या हो रही थी। उन्होंने बताया कि जब नामांकन जमा किया जाता है, तब निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि उस फॉर्म के साथ संगलग्न दस्तावेज और मोटी-मोटी सारी जानकारी देखें। ऐसी ही प्रक्रिया मीनाक्षी नटराजन के फॉर्म जमा करवाते वक्त हुई। निर्वाचन अधिकारी ने फॉर्म देखा और पूछा कि कोई दस्तावेज की कमी है क्या, उन्होंने बताया कि कोई कमी नहीं थी। एक चेक लिस्ट होती है। उस पर भी उन्होंने लिखा सभी दस्तावेज हैं कोई कमी नहीं है।
जेपी धनोपिया ने आरोप लगाए हैं कि भाजपा पहले ही षडयंत्र रच चुकी थी। फॉर्म जमा कराने के बाद 2 बजे रिटायर्ड हाईकोर्ट जस्टिस जज रोहित आर्य पहुंचे, वे मध्य प्रदेश की कमेटी वन नेशन वन इलेक्शन के प्रभारी हैं। वो बोले कि वे बीजेपी की तरफ से आए हैं। तब उन्होंने पूछा कि कोई प्रावधान है पार्टी की ओर से आने का। तब जज बोले कोई प्रावधान नहीं है। जब उन्होंने पूछा कि वे किस शिकायत की बात कर रहे हैं। वे बोले कि महेश केवट की शिकायत की। बोले- एक पेपर पर काले पेन से लिखा था कि मीनाक्षी नटराजन पर तेलंगाना कोर्ट में आपराधिक केस दर्ज है। न कोई अपील न कोई दलील, कोई कांग्रेस की बात सुनने को ही तैयार नहीं थे। हालांकि उन्होंने बाद में यह भी कहा कि यदि इस नोटिस की जानकारी शपथ पत्र में दे दी होती तो इतना हंगामा नहीं होता।
बता दें की मीनाक्षी नटराजन के मामले को लेकर अब एमपी कांग्रेस ने हाईकोर्ट में याचिका दायकर करने की तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही वह याचिका दायर करेगी। वहीं कांग्रेस इस मामले को लेकर प्रदेश समेत देश व्यापी प्रदर्शन करने का एलान भी कर चुकी है।