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विभीषण कौन! कांग्रेस की करा रहे फजीहत, 7 प्वाइंट में समझें कद्दावरों का खेल

MP Congress- मीनाक्षी नटराजन केस के बाद भी नहीं सुधर रहे कांग्रेसी, फजीहत करा रहे वरिष्ठ नेता, गुटबाजी हावी हुई
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meenakshi natrajan case

meenakshi natrajan case: मीनाक्षी नटराजन नामांकन रद्द मामले पर हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही हैं। (फोटो सोर्स: jitu patwari X handle)

Meenakshi Natarajan Case- एमपी की राज्यसभा सीट का मामला देशभर में सुर्खियों में बना हुआ है। यहां कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन Meenakshi Natarajan का नामांकन पत्र ही रद्द कर दिया गया था। यह मामला अब कानूनी दांवपेचों में उलझ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि नियमानुसार इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। देश की शीर्ष कोर्ट ने इसके लिए हाईकोर्ट जाने की भी सलाह दी। अब कांग्रेस नेता हाईकोर्ट में चुनाव याचिका लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने जहां देश में सियासी हड़कंप मचा दिया वहीं कांग्रेस की खासी फजीहत भी कराई है। मीनाक्षी नटराजन केस ने पार्टी नेताओं की अंदरूनी कलह फिर उजागर कर दी। बीजेपी स्पष्ट कह रही है कि हमें कांग्रेस के नेता ने ही मीनाक्षी नटराजन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए। यह गद्दार कौन है, इसका आज तक खुलासा नहीं हो सका है। इसके विपरीत पार्टी में एक अलग ही खेल चल रहा है। वरिष्ठ नेता तक सार्वजनिक रूप से एक दूसरे से उलझ रहे हैं। एकजुटता के दावों के बीच गुटबाजी हावी हो रही है, राष्ट्रीय नेतृत्व तक को आंखें दिखाई जा रहीं हैं।

राज्यसभा के लिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने की खिलाफत करते हुए कांग्रेस अब हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रही है। पार्टी के अधिवक्ता और कानूनी विशेषज्ञ इसके लिए जरूरी दस्तावेज जुटा रहे हैं।

इस बीच सब कुछ गंवा देने के बाद भी कांग्रेस नेता सबक सीखने को तैयार नहीं दिख रहे। मीनाक्षी नटराजन प्रकरण ने पार्टी की गुटबाजी, अंदरूनी कलह, नेताओं के आपसी मतभेद एक बार फिर उजागर कर दिए हैं। दबाव की राजनीति, इस्तीफे, गैर जरूरी बयानबाजी जैसे कांग्रेसी खेल, खुलकर खेले जा रहे हैं।

  1. पहले पत्र और फिर त्यागपत्र

राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी का दिग्विजय सिंह के समर्थक भोपाल के वरिष्ठ नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने खुलकर विरोध किया। उन्होंने पहले पार्टी हाईकमान को पत्र लिखा और बाद में त्यागपत्र दे दिया।

  1. दिग्विजय और चौधरी की तकरार

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ भोपाल में कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कान्फ्रेेंस की। इसमें दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की तकरार हुई। घटनाक्रम का वीडियो भी वायरल हुआ। हरीश चौधरी, ​दिग्विजय सिंह से यह कहते सुने गए कि "अब हमें अपने हिसाब से करने दीजिए"।

  1. हाथ जोड़कर किया इंकार

प्रदेश प्रभारी की बात से दिग्विजय सिंह इतने नाराज हुए कि प्रेस को संबोधित ही नहीं किया। जीतू पटवारी उन्हें माइक थमाने की कोशिश करते रहे और वे हाथ जोड़कर इंकार करते रहे।

  1. जीतू पटवारी -उमंग सिंघार

भोपाल में चुनाव आयोग के कार्यालय के सामने धरना में जीतू पटवारी और उमंग सिंघार की तनातनी उभर आई। मीडिया को बाइट चाहिए थी। प्रदेशाध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष से कहा- उमंग, इन्हें बता दो…। उमंग सिंघार तुरंत पलटकर बोले- जीतू, तुम ही बोल दो…।

  1. कमलनाथ समर्थक विधायक भड़के

बाड़ाबंदी के लिए कर्नाटक ले जाए जा रहे कांग्रेस विधायकों को एयरपोर्ट पर कई घंटों तक बैठाए रखा और बाद में सभी को लौटना पड़ा। कमलनाथ समर्थक माने जाते हरदा के विधायक आरके दोगने इसपर पार्टी पर ही बरस पड़े। उन्होंने कहा कि बीजेपी और सरकार तो हमारे पीछे पड़ी ही है, पार्टी भी बेइज्जती करा रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने वरिष्ठ नेताओं से शिकायत करने की भी बात कही। इसके बाद प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सभी विधायकों से बाकायदा माफी मांगी।

6- विभीषण कौन!

तेलंगाना केस की जानकारी बीजेपी के पास किसने पहुंचाई, कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है। पार्टी के विभीषण का आज तक पता नहीं चल सका है। सूत्रों के अनुसार, भोपाल से लेकर दिल्ली तक एक दिग्गज नेता का नाम लिया जा रहा है पर इसका खुलासा नहीं किया जा रहा।

7- विधायक और संगठन नेताओं में सामंजस्य की कमी

दिल्ली में हुए प्रदर्शन में भी विधायक और संगठन नेताओं में सामंजस्य की कमी दिखी।