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एमपी में Monsoon 2026 का ट्रांजिशन पीरियड, कब होगी झमाझम बारिश?

MP Monsoon 2026: भारतीय मौसम विभाग भोपाल केंद्र ने बताया एमपी में प्री मानसून की बारिश ने दिए मानसून के बड़े संकेत, अभी असमान बारिश, मौसम वैज्ञानिकों ने बताया मानसून का यह Monsoon 2026 का ट्रांजिशन पीरियड, एक साथ कई मौसम प्रणालियां एक्टिव

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MP Monsoon 2026

MP Monsoon 2026: मध्य प्रदेश में प्री मानसून की बारिश ने दिए संकेत, मानसून ने दे दी दस्तक। (फोटो सोर्स: Freepik AI generated)

MP Monsoon 2026: मध्यप्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दस्तक दे दी है। लेकिन इसकी बारिश प्रदेशभर में असमान रूप से दर्ज की गई है। 13 जून 2026 तक के बारिश के आंकड़े और ताजा वर्षा रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून से पूर्व होने वाली गतिविधियों और प्री मानसून की बारिश ने रिकॉर्ड बनाए हैं। जबकि कई जिलों को अब भी व्यापक बारिश का इंतजार है।

मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र नायक के मुताबिक पिछले 24 घंटे में डिंडोरी में 43 मिमी, विदिशा के लटेरी में 40 मिमी, उमरिया के नौरोजाबाद में 37.6 मिमी बारिश, तो पाली में 35.2 मिमी, मुरैना के अम्बाह में 35 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि मानसून की सक्रियता पूर्वी मध्य प्रदेश और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है।

ग्वालियर-चंबल अंचल में बारिश ने तोड़े रिकॉर्ड

प्रदेश में सर्वाधिक वर्षा विचलन उत्तर-मध्य भाग में दर्ज किया गया है-

मुरैना : +839%
भिंड : +696%
उमरिया : +646%
अशोकनगर : +573%
श्योपुर : +427%
ग्वालियर : +176%
विदिशा : +165%
नरसिंहपुर : +152%

इन जिलों में लगातार गरज-चमक वाले बादलों, आंधी और प्री-मानसून गतिविधियों ने सामान्य से कई गुना अधिक बारिश हुई है। 13 जून को भी अम्बाह (35 मिमी), मुंगावली (32 मिमी), श्योपुर (22.6 मिमी), अटर (18 मिमी) और ग्वालियर (13.8 मिमी) में अच्छी वर्षा दर्ज की गई।

महाकौशल बना मानसून की आमद के अच्छे संकेत

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक महाकौशल क्षेत्र में मानसून की सक्रियता सबसे स्पष्ट दिखाई दे रही है।
डिंडोरी : +332%
छतरपुर : +126%
सागर : +129%
दमोह : +22%

डिंडोरी के बजाग में (43 मिमी), मेहदवानी (24.2 मिमी), जबलपुर के पनागर (20.2 मिमी), नरसिंहपुर के गाडरवारा (23 मिमी) तथा सागर (23.2 मिमी) में दर्ज वर्षा ने संकेत दिया है कि मानसूनी धाराएं प्रदेश के पूर्वी भाग में सबसे ज्यादा मजबूत बनी हुई हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इन क्षेत्रों में मिट्टी की नमी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह समय है कि किसान खरीफ बुवाई की तैयारी तेज कर सकते हैं।

नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा में संतुलित स्थिति (MP Monsoon Rainfall)

नर्मदापुरम : +9%
छिंदवाड़ा : सामान्य श्रेणी
पचमढ़ी (20 मिमी)
बंखेड़ी (18.4 मिमी)
गोडाडोंगरी (18 मिमी)

ये वर्षा घटनाएं बताती हैं कि इन क्षेत्रों में वर्षा की स्थिति संतुलित बनी हुई है।

भोपाल, मालवा और निमाड़ में चिंता (MP Pre monsoon 2026)

राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी भागों में बारिश की स्थिति फिलहाल चिंताजनक बनी हुई है।
भोपाल : -63%
रायसेन : -72%
राजगढ़ : -76%
धार : -98%
बड़वानी : -83%
बुरहानपुर : -80%
बैतूल : -60%
मंडला : -88%
बालाघाट : -91%
सिवनी : -74%

हालांकि 13 जून को बैरसिया में 7.1 मिमी तथा रायसेन जिले में कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा दर्ज हुई, लेकिन यह अभी तक दीर्घकालिक कमी को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

20 से अधिक जिले अब भी व्यापक वर्षा से वंचित (MP Pre monsoon)

प्रदेश के कई जिलों में वर्षा विचलन 100% या उसके आसपास बना हुआ है। इसे लेकर शैलेंद्र नायक कहते हैं कि यह स्थिति दर्शाती है कि वहां अभी तक प्रभावी मानसूनी वर्षा नहीं पहुंची है।

इन जिलों में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, सीहोर, हरदा, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, रतलाम, अलीराजपुर, झाबुआ, शिवपुरी, दतिया, रीवा, सिंगरौली और शहडोल।

यह दर्शाता है कि मानसून अभी पूरे प्रदेश में समान रूप से सक्रिय नहीं हुआ है।

बुंदेलखंड की मिली-जुली तस्वीर

बुंदेलखंड में वर्षा का वितरण अत्यंत असमान है।

छतरपुर : +126%
सागर : +129%
दमोह : +22%
टीकमगढ़ : -38%
पन्ना : -29%

एक ही भौगोलिक क्षेत्र में वर्षा की इतनी विषमता मानसून के शुरुआती चरण की विशेषता मानी जाती है।

कृषि पर क्या दिखेगा असर

जिन क्षेत्रों में वर्षा सामान्य से अधिक हुई है, वहां किसान सोयाबीन, मक्का, धान और दलहनी फसलों की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। दूसरी ओर मालवा, निमाड़ और पश्चिमी जिलों के किसान अभी भी व्यापक वर्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि अगले सप्ताह पर्याप्त वर्षा नहीं होती है, तो खरीफ बुवाई का कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।

आगे क्या संकेत हैं?

दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्यप्रदेश में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों से नमी की आपूर्ति बनी हुई है। मौसम संकेत बताते हैं कि अगले 3 से 5 दिनों में वर्षा गतिविधियों में और वृद्धि हो सकती है तथा वर्तमान में शुष्क बने क्षेत्रों तक भी मानसून पहुंच सकता है और प्रदेश के सभी जिलों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

मानसून की इस स्थिति पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट (MP Monsoon)

मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र नायक बताते हैं कि 13 जून तक के आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि मध्यप्रदेश मानसून के संक्रमण काल से गुजर रहा है। ग्वालियर-चंबल, विदिशा और महाकौशल के कई जिलों में वर्षा सामान्य से कई गुना अधिक रही है, जबकि मालवा, निमाड़ और पश्चिमी भाग अभी भी वर्षा की प्रतीक्षा में हैं। मानसून के प्रारंभिक चरण में इस प्रकार का असमान वितरण सामान्य होता है। यदि अगले कुछ दिनों तक नमी की आपूर्ति बनी रहती है तो प्रदेश में वर्षा का संतुलन तेजी से बेहतर हो सकता है।

एमपी के ऊपर कई मौसम प्रणालियां एक्टिव (MP Monsoon System)

वर्तमान में मध्यप्रदेश के ऊपर सक्रिय मौसमी द्रोणिका, पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण से आ रही आर्द्र मानसूनी हवाओं की संयुक्त क्रिया प्रदेश में मौसम को अत्यधिक गतिशील बनाए हुए है। यही कारण है कि कुछ जिलों में अत्यधिक वर्षा हो रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों में अभी भी मानसून की प्रतीक्षा बनी हुई है। जैसे-जैसे मानसून दक्षिण छत्तीसगढ़ की ओर आगे बढ़ेगा, प्रदेश में वर्षा का वितरण अधिक संतुलित होने की संभावना है।