
भोपाल। 12 साल की उम्र में हुई टाइफाइड की बीमारी ने मुझे ऐसी पीड़ा दी जिसे मुझे करीब 40 साल तक सहन करनी पड़ी। यह पीड़ा मुझे माइग्रेन नामक बीमारी के रूप में मिली। इसके कारण आए दिन मैं परेशान रहती थी।
भेल स्थित कस्तूरबा अस्पताल सहित दिल्ली एम्स तक में इसकी जांच और इलाज करवाया पर कहीं से थोड़ी सी भी राहत नहीं मिली। इसके बाद कस्तूरबा अस्पताल से मुझे तत्कालीन डॉक्टर सरला मेनन ने योग अनुसंधान केंद्र एवं रिसर्च सेंटर के लिए रेफर किया।
यहां पर योग अभ्यास प्राणायम सहित कई अन्य क्रियायों के माध्यम से मेरा इलाज शुरू किया गया और इसकी बदौलत पिछले 40 वर्षों से परेशान इस बीमारी से मुझे राहत मिली और आज मैं पूरी तरह ठीक हो चुकी हूं। यह बात माइग्रेन की बीमारी से पीडि़त केशर बड़ोनिया ने बताई।
यह बीमारी इन्हें 12 साल की उम्र में हुई थी, अब इनकी उम्र 63 वर्ष है। उनके अनुसार मैं लोगों को बताना चाहती हूं कि योग सभी बीमारियों का इलाज है। इसके माध्यम से गंभीर से गंभीर बीमारियोंं को दूर किया जा सकता है। लोग इसे अपनाकर स्वस्थ्य जीवन जी सकते हैं और बीमारियों से मुक्ति पा सकते हैं। इसके साथ ही खून पसीने की कमाई हुई लाखों रुपए भी बचा सकते हैं।
हमारे पास कस्तूरबा अस्पताल से रेफर किए गए मरीज आते हैं। इसमें अलग-अलग गंभीर बीमारियों के मरीज आते हैं, जिनका वर्षों से इलाज चल रहा है। यहां मेडिसिन के साथ योग की क्रियाएं भी कराई जाती हैं।
- अमृत बिन्दु, प्रभारी योगा कन्सलटेंट योग अनुसंधान केंद्र कस्तूरबा
जानिये क्या है जलनेति?
जलनेति एक महत्वपूर्ण शरीर शुद्धि योग क्रिया है, जिसमें पानी से नाक की सफाई की जाती और आपको साइनस, सर्दी, जुकाम , पॉल्यूशन, इत्यादि से बचाता है। जलनेति में नमकीन गुनगुना पानी का इस्तेमाल किया जाता है।
इसमें पानी को नेटिपोट से नाक के एक छिद्र से डाला जाता है और दूसरे से निकाला जाता है। फिर इसी क्रिया को दूसरी नॉस्ट्रिल से किया जाता है। संक्षेप में कहा जाए तो जलनेति एक ऐसी योग है, जिसमें पानी से नाक की सफाई की जाती है और नाक संबंधी बीमारीयों से निजात पाते हैं।
जलनेति दिन में किसी भी समय की जा सकती है। किसी को जुकाम हो तो इसे दिन में कई बार किया जा सकता है। अभ्यास से नासिका क्षेत्र में कीटाणुओं को पनपने नहीं देती।
जलनेति के फायदे...
जलनेति के बहुत सारे शारीरिक एवं चिकित्सकीय लाभ हैं। यदि आप सिरदर्द से परेशान हैं तो यह क्रिया अत्यंत लाभकारी है।
जलनेति अनिद्रा में: अनिद्रा से ग्रस्त व्यक्ति को इसका नियमित अभ्यास करनी चाहिए। सुस्ती के लिए यह क्रिया अत्यंत लाभकारी होती है।
जलनेति बालों का गिरना रोके: अगर आपको बालों का गिरना बंद करना हो तो इस क्रिया का अभ्यास करें।
जलनेति बालों के सफेद में: यह बालों को सफेद होने से भी रोकता है। जलनेति मेमोरी में: आपके मेमोरी को बढ़ाने में यह विशेषकर लाभकारी है।
जलनेति नाक रोग में: नाक के रोग तथा खांसी का प्रभावी उपचार होता है। नेत्र-विकार में नेत्र अधिक तेजस्वी हो जाते हैं। नेत्र-विकार जैसे आंखें दुखना, रतौंधी तथा नेत्र ज्योति कम होना, इन सारी परेशानियों का इलाज इसमें है।
जलनेति कान रोग में: कानों के रोगों, श्रवण शक्ति कम होने और कान बहने के उपचार में यह लाभकारी है।
जलनेति आध्यात्मिक लाभ: वायु के मुक्त प्रवाह में आ रही बाधाएं दूर करने से शरीर की सभी कोशाओं पर व्यापक प्रभाव डालता है जिसके कारण मनो-आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पडता है।
जलनेति का वैज्ञानिक पक्ष: जलनेति में कुछ अधिक नमकीन जल का प्रयोग करने से नाक के अंदर खुजली होती है जिसके कारण झिल्ली में रक्तप्रवाह बढ़ता है तथा ग्रंथीय कोशाओं का स्राव भी बढ़ता है, जिससे ग्रंथियों के द्वार साफ होते हैं। नेति के कारण मात्र नासा-गुहा को ही लाभ नहीं होता बल्कि नेत्रों एवं साइनस के रोगों में भी लाभ मिलता है।