
MP News : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के पराक्रम की जानकारी देशवासियों के बीच लाने वाली सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान देने वाले मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अब आगे मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। कैबिनेट की अनुशंसा पर एमपी के राज्यपाल की मुहर लग चुकी है। अब इस केस को आगे बढ़ाने की अनुमति न देने की रिपोर्ट प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट भेजी जाएगी।
बता दें कि, कैबिनेट की अनुशंसा पर मंगलवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी मुहर लगा दी है। वहीं, गृह विभाग ने अपने स्तर पर मामले का परीक्षण कराकर आदेश प्रारूप मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है। एक-दो दिन में यहा से हरी झंडी मिलते ही गृह विभाग अभियोजन की स्वीकृति न देने संबंधी आदेश जारी कर उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट भेज देगा।
आपको बता दें कि, मोहन कैबिनेट में मंत्री विजय शाह ने पिछले साल यानी 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। मंच को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि, उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतारकर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उन्हीं की बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेज दिया।' विजय शाह के इस बयान के बाद विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जन ने भी उनकी शब्दावली पर सवाल उठाए थे। जमकर बवाल मचने के बाद हाईकोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया था।
मंत्री विजय शाह की इस टिप्पणी पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी के निर्देश दिए। आगे मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की गई। एसआईटी ने जांच करके सीलबंद रिपोर्ट न्यायालय में पेश की। साथ ही, विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी। लगातार मामला टलने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार को शीघ्र निर्णय करने के निर्देश दिए थे।
पिछली बार 31 अगस्त को सुनवाई से पहले 25 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में राज्यपाल (सक्षम प्राधिकारी) से मुकदमा न चलाने संबंधी अनुशंसा का फैसला लेकर प्रस्ताव भेजा, जिसे अनुमोदन के साथ उन्होंने लौटा दिया है। सूत्रों की मानें तो गृह विभाग ने विधि एवं विधायी विभाग से आदेश के प्रारूप का परीक्षण कराकर मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा है। यहां से स्वीकृति मिलते ही विभाग सरकार के फैसले के आधार पर आदेश जारी कर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट भेजेगा।