national park: मध्य प्रदेश में यहां राज्य के कई जिलों से वन्यजीव इलाज कराने पहुंचे है। एमपी के इस नेशनल पार्क में सभी वाइल्डलाइफ जानवरों का आधुनिक मशीनों से उपचार किया जाता है।
national park: घायल बाघ, चीता और भालू की अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीनों से जांच, आईसीयू और एमआरआई के जरिए आंतरिक परीक्षण फिर सर्जरी और बाद में मरहम, पट्टी, प्लास्टर के जरिए सटीक उपचार। वह भी खूंखार जानवरों का, यह आसान काम नहीं हैं। लेकिन इसी तरह के करीब 50 खूंखार वन्यजीवों का उपचार राष्ट्रीय उद्यान वन विहार में बने रेस्क्यू सेंटर में हो चुका है। हाल ही में यहां एक यूरेशियन ग्रिफन गिद्ध का उपचार किया गया। जो अब पूरी तरह से स्वस्थ है। और अफगानिस्तान पहुंच चुका है। यह प्रदेश का इकलौता ऐसा सेंटर हैं सांपों तक के उपचार की सुविधा है।
445 वर्ग हेक्टेयर में फैले वन विहार बनेरेस्क्यू सेंटर में प्रदेश भर से घायल वन्यजीवों को लाया जाता है। यहां के वेटनरी हॉस्पिटल में बने रेस्क्यू सेंटर में सभी तरह के खूंखार वन्यजीवों का इलाज के विशेष इंतजाम हैं। वन विहार में 1500 से ज्यादा वन्यजीव हैं।
वन विहार के रेस्क्यू सेंटर में कुछ माह पहले टाइगर के दो शावक सीहोर में ट्रेन दुर्घटना में घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए यहां भर्ती कराया गया था।प्रदेश का सबसे बुजुर्ग भालू की चालीस साल की उम्र यहीं मौत हुई थी।
रेस्क्यू सेंटर में वन्यप्राणियों को इलाज के लिए आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, स्वचालित ऑपरेशन टेबल, एनेस्थीसिया यूनिट, हाइड्रोलिक पिंजरा और सोनोग्राफी मशीनें हैं। इसके अलावा वन्यजीव एनेस्थीसिया,कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एंडोस्कोपी और आंतरिक चिकित्सा सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम है।
रेस्क्यू सेंटर में सरीसृपों के उपचार की भी व्यवस्था है। जहां सांपों और कछुओं का इलाज होता है। यहां घायल जानवरों के साथ-साथ बचाए गए जानवरों के इलाज के लिए लाया जाता है। केंद्र में बचाए गए जानवरों को ऐसे स्थानों पर रखा जाता है, जो उनके प्राकृतिक आवास के समान होते हैं। वन विहार के संचालक एएम मीना ने बताया कि वन्यजीवों को प्रदेशभर से रेस्क्यू कर यहां लाया जाता है। इसके लिए यह विशेष सेंटर है। जहां इलाज की सुविधा उपलब्ध है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम भी है।