
Monsoon- मध्य्रदेश में मानसून का मंगल प्रवेश हो चुका है। महाराष्ट्र कवर करते हुए नौ दिन की देरी से प्रदेश में मानसून बुधवार को हाजिर हो गया। अब राजस्थान की ओर बढ़ रहा है। मप्र में दक्षिणी हिस्से से मानसून ने एंट्री की। बंगाल की खाड़ी व अरब सागर से गतिविधियां बढऩे से एक ही दिन में इंदौर से मंडला तक 16 जिलों में मानसून का प्रवेश हो गया। मौसम विभाग का कहना है, दो-तीन दिन में प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी जल्द मानसून की दस्तक होगी। भोपाल में 24-48 घंटे में मानसून प्रवेश करेगा। प्रदेश के उत्तरी इलाके ग्वालियर में मानसून सबसे अंत में पहुंचेगा।
मप्र में अमूमन 15 जून तक मानसून आता है। इस बार 9 दिन देर से आया। पिछले 10 साल में सिर्फ दो बार समय पर या पहले मानसून पहुंचा है। पिछले साल भी 1 दिन देर 16 जून को दस्तक दी थी। 10 साल में तीसरी बार मानसून 24 जून को आया। इसके पहले 2023, 2018, 2017 में मानसून 24 जून को आया था।
बुधवार को बैतूल, खरगोन में जोरदार बारिश हुई। भोपाल में शाम 5 से 8.30 बजे तक 33 मिमी बारिश हुई। खंडवा के लखनपुर बंदी में बोवनी में जुटे काका-भतीजे पर आकाशीय बिजली गिर गई। हादसे में काका की मौत हो गई। पांढुर्ना में 1 की मौत हो गई।
प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर चल रहा है। इससे निचले इलाकों में पानी भर गया है। बैतूल, छिंदवाड़ा, खरगोन सहित अन्य स्थानों पर बुधवार को झमाझम बारिश हुई। भोपाल में भी शाम को काले बादल छाए, बारिश भी हुई। इससे लोगों को तेज गर्मी से राहत मिली।
मानसून के प्रवेश के साथ ही खरीफ फसलों की बोवनी को लेकर किसानों के चेहरे खिल उठे। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा सोयाबीन का है। कृषि विभाग ने किसानों को 90 से 95 दिन में तैयार होने वाली सोयाबीन किस्मों जैसे एनआरसी- 150, एनआरसी-165, जेएस-23-03, जेएस-23-09, जेएस-22-12, जेएस-22- 16 की बुआई की सलाह दी है। विभाग का मानना है, मौसम की अनिश्चितता में ये किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प हैं।
मौसम विभाग के अनुसार आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी, डिंडौरी में मानसून आ चुका है। अगले चार दिन में मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय हो जाएगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार ग्वालियर चंबल इलाके में मानसून सबसे अंत में पहुंचेगा।