
MP News : आयकर विभाग में रिटर्न फाइल का काम एक महीने से चल रहा है, लेकिन विवरणी फाइल होने के बाद भी मध्य प्रदेश के कई आयकरदाताओं को रिफंड उनके खाते में नहीं पहुंच रहा है। विवरणी दाखिल करने का काम ऑनलाइन होने के बावजूद रिफंड नहीं मिलने से करदाता कर सलाहकारों से संपर्क कर रहे हैं। इस मामले में विभाग की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता।
करदाताओं में वेतनभोगी कर्मचारियों का पैसा तो पूरे साल भर कटता है। अर्थात् जो टीडीएस पहले से हो चुका है, उसकी वापसी नहीं होने से करदाता मायूस हैं। यह भी कहा जा रहा है कि टैक्स जमा में देरी होने पर 12 फीसदी ब्याज लगता है, जबकि रिफंड के रूप में वापसी 6 फीसद के हिसाब से ही होती है।
आयकर विवरणी दाखिल करने के बाद सामान्य तौर पर 7 से 10 दिन में रिफंड आ जाता है, लेकिन इस बार करीब एक महीने का समय गुजर चुका है। इस देरी से आयकरदाता चिंता में है। विभागीय जानकारों का कहना है कि, विभाग में सख्त सत्यापन और डेटा विसंगतियों के कारण आयकर रिफंड में देरी होती है। आयकर विभाग दाखिल किए गए रिटर्न की वार्षिक सूचना विवरण (एआइएस) और फॉर्म 26 एएस से मिलान करता है। अगर आय, टीडीएस या कटौतियों से मेल नहीं खाती है तो रिटर्न को जांच के लिए चिन्हित किया जाता है।
-रिफंड की प्रक्रिया तभी शुरू होगी जब रिटर्न को ईस त्यापित कर लेंगे
-अगर आपका बैंक खाता ईस त्यापित है तो उसके बाद ही रिफंड मिलेगा।
-बैंक रेकॉर्ड में नाम/पैन नंबर का मिलान नहीं होने पर।
-पिछला कर बकाया होने पर रिफंड खाते में जमा नहीं होगा।
-चाही गई कटौती के दावे की समीक्षा में अधिक समय लगना आदि।
आयकर मामलों के जानकार राजेश कुमार जैन का कहना है कि, आयकर नोटिस से बचने के लिए और जल्द रिफंड प्राप्त करने के लिए आयकर विवरणी भरने के पूर्व 26 एएस और एआइएस से अपने डाटा का मिलान अच्छी तरह से कर लेना चाहिए। रिफंड के लिए करदाता इंतजार में है।