
Live-in relationship:मप्र में यूसीसी लागू करने की पूरी तैयारी (Photo Source - freepik)
Live-in relationship: अब मप्र के अंदर लिव-इन-रिलेशनशिप से पैदा होने वाली संताने अपने जैविक माता-पिता की संपत्ति में बराबर की हकदार होंगी। मोहन सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में इसके लिए कड़े कानून लेकर आ रही है। अभी ऐसे संबंधों से पैदा होने वाली संतानों को कानूनी अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता था। यहां तक कि जब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों में अनबन हो जाती तो संतानों की परवरिश संकट में पड़ जाती है। विवादों का निपटारा आसान नहीं होता।
असल में मप्र यूसीसी लागू करने जा रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो यह जुलाई के अंत तक लागू हो जाएगा। सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने यूसीसी का ड्राफ्ट सौंपा था। समिति ने उक्त ड्राफ्ट में कई सिफारिशें की है, जिसमें लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीयन अनिवार्य करने पर जोर दिया है।
ड्राफ्ट बनाने वाली समिति में शामिल एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया लिव-इन-रिलेशनशिप को कानूनी दायरे में नहीं लाया तो भविष्य में कई मुश्किलें होगी। सबसे बड़ी दिक्कत संबंधों में होने वाले विवादों का निपटारा करने में होगा। पारिवारिक असंतुलन बढ़ सकता है।
मप्र में यूसीसी लागू करने की पूरी तैयारी है। उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। आगामी विधानसभा सत्र में यूसीसी ड्रॉफ्ट को सदन के पटल पर लाया जाएगा। ड्रॉफ्ट पर चर्चा कर इसकी अच्छाई और सच्चाई को सबके सामने लाने का प्रयास रहेगा। समिति ने हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी वर्ग के लोगों की राय ली है। - डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
बिना सहमति और संवाद के लाया गया यूसीसी कानून समाज में बंटवारे का काम करेगा। यूसीसी की घोषणा ने एकता की बजाय अलगाव पैदा किया है। सरकार तुष्टीकरण की राजनीति छोड़े और सभी समुदायों को विश्वास में लेते हुए कोई साझा मसौदा तैयार किया जाए। जल्दबाजी अलोकतांत्रिक तरीका भाजपा की असहिष्णु सोच को दर्शाता है। - उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष विधानसभा
विवाह पंजीयनः सभी धर्मों के लोगों को विवाह पंजीकरण कराना होगा। इसकी अवधि 30 से 60 दिन हो सकती है।
कोर्ट से ही तलाकः कोई भी धर्म हो, अदालत के माध्यम से पूरी होने वाली तलाक की प्रक्रिया ही मान्य होगी। अभी कुछ धर्मों में मौखिक या प्रथागत तलाक की प्रथा है।
बहु विवाह बंदः प्रत्येक धर्मों में पति या पत्नी के जीवित रहते या कानूनी रूप से तलाक नहीं होने तक दूसरे विवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध।
संपत्ति: पुत्र-पुत्रियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान कानूनी अधिकार होंगे। अभी तक कुछ धर्मों में अपनी मान्यता के अनुसार प्रावधान थे।
यूसीसी से आदिवासी समेत कई संकटग्रस्त और विशेष पिछड़ी जातियों को बाहर रखने की सिफारिश की गई है। हालांकि पूर्व में मुख्यमंत्री भी कह चुके थे कि यूसीसी से आदिवासियों को बाहर रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने ड्राफ्ट को मंगलवार मुख्य सचिव अनुराग जैन को सौंप दिया। सरकार यूसीसी को विधानसभा के इसी मानसून सत्र में लाने जा रही है। मुख्यमंत्री इसकी घोषणा कर चुके हैं। उसके पहले 18 जुलाई को भोपाल के पास जगदीशपुर में होने वाली कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक के प्रस्ताव को रखा जाएगा।
Updated on:
15 Jul 2026 10:54 am
Published on:
15 Jul 2026 10:52 am
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