MP Board Result 2026: फेल हुए स्टूडेंट्स घबराने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है। जो भी परिणाम आएं उसे स्वीकार करें। हताश न हों....
MP Board Result 2026: लंबे समय से 10वीं- 12वीं के रिजल्ट का इंतजार कर रहे स्टूडेंट के लिए आज बड़ा दिन है। जानकारी के लिए बता दें कि माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं- 12वीं का परीक्षा परिणाम जारी कर दिया है। ये रिजल्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सीएम हाउस से घोषित किया गया। इसके साथ ही प्रदेश के लगभग 16 लाख छात्रों का इंतजार खत्म हो गया है। रिजल्ट पोर्टल/ऐप स्लो हो सकते हैं, इसलिए धैर्य रखना होगा।
इस वर्ष 10वीं में लगभग 9 लाख और 12वीं में करीब 7 लाख विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। 10वीं की परीक्षाएं 11 फरवरी से 6 मार्च तक, 12वीं की परीक्षाएं 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच हुई थीं। इस साल की परीक्षा में अच्छे नंबर लाने वाले मेधावियों की लंबी लिस्ट है। लेकिन, आज बात उनकी जो रिजल्ट से निराश हुए हैं। कई स्टूडेट्स फेल भी हुए हैं। फेल हुए स्टूडेंट्स घबराने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है। जो भी परिणाम आएं उसे स्वीकार करें। हताश न हों। आत्मविश्लेषण करें और फिर से मेहतन करने जुट जाएं। इसके साथ ही खुद को कभी कम न आकें। एक्सपर्ट कहते हैं कि आप अपना हौसला बनाए रखें।
मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी का बच्चों से कहना है कि ये जीवन का रिजल्ट नहीं। रिजल्ट के लिए नहीं, जिंदगी की परीक्षा में पास होने के लिए पढ़ें। कहीं खुशी तो कहीं गम होता ही है। रिजल्ट के बाद अपने विवेक से काम लें। खुद को किसी भी तरीके से नुकसान नहीं पहुंचाएं। जीवन जीने में 10वीं 12वीं का कोई रोल नहीं होता है इसलिए बिल्कुल भी परेशान न हो। जो भी रिजल्ट आए आगे फिर मेहनत करें।
परीक्षा परिणाम में जो स्टूडेंट परीक्षा में फेल हो गए है उन्हें निराश होने की बजाए आत्म मूल्यांकन करना होगा। आगे का सोचना होगा। कमजोरियों पर काम करना होगा। अपनी गलती से सीखने की जरूरत है, न कि उदास होने कि। अब आगे आपको टाइम टेबल बनाकर तैयारी करनी होगी। जीवन में लक्ष्य बनाना होगा। जितने अंक चाहिए उसको अपने कमरे में लगा लें। कुल मिलाकर स्टूडेंट को चिंता नहीं चिंतन करने की जरूरत है।
यह परीक्षा आमतौर पर ज्ञान और कौशल की एक सीमित श्रेणी का आकलन करती है। जो जानकारी को याद करने पर आधारित होती है। यह किसी स्टूडेंट की बुद्धिमत्ता की जटिलता को पूरी तरह से पकड़ नहीं सकता है। जिसमें महत्वपूर्ण सोच, समस्या-समाधान, रचनात्मकता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता शामिल है।
-रिजल्ट आने के बाद बच्चों पर नजर रखें।
-ज्यादा से ज्यादा समय बच्चों को दें, साथ रहे।
-बच्चों से हमेशा बातचीत करें।
-समझाएं ताकि वह हिम्मत न हारे।
-बच्चों के नंबरों से उसका आकलन न करें।
-कम अंक आने पर किसी भी दूसरे बच्चे से तुलना न करें। तुलना करने से बच्चों के अंदर खुद से प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाती है।
-दोस्ताना व्यवहार बनाएं रखें। खुल कर बात करें।
-आगे और मेहनत करने की बात कहें। बच्चों के साथ समय बिताए।
-उनका लड़का देखा कितने नंबर लाया है।
-तुमने तो मेरी नाक कटवा दी
-तुमको अभी भी शर्म नही आ रही है।
-मेरी नजरों से दूर हो जाओ
-तुमने साल भर पढ़ाई नही की, क्या किया
-तुमसे पढ़ाई- लिखाई नहीं हो पाएगी
-तुम कभी पास नहीं हो सकते
-खेलने-कूदने में ही समय बिता दिया