खुले बोरवेलः मासूमों का दम घुटा, पर सरकारों को शर्म भी नहीं आई

यहां सिर्फ राघवेंद्र की बात नहीं है, इससे पहले गुढ़गांव की माही, सोनू, अंजू, प्रिंस आदि समेत तमाम बच्‍चे अपने ही घर के आसपास खुले पड़े बोरवेल में फंस चुके हैं। 

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Oct 18, 2015
Child Drop in borewell
भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने 12 फरवरी 2012 में सभी राज्‍यों के मुख्‍य सचिवों को आदेश दिए थे कि वे सुनिश्चित करें कि उनके राज्‍य में जितने भी बोरवेल खोदे जाएं, उन्‍हें ढकने के पुख्‍ता इंतजाम भी किए जाएं। लेकिन न्‍यायालय के फरमान का पालन कहीं होता नहीं दिखता है।


इसी कारण मुरैना का राघवेंद्र आज जिंदगी और मौत के बीच फंसा हुआ है। यहां सिर्फ राघवेंद्र की बात नहीं है, इससे पहले गुढ़गांव की माही, सोनू, अंजू, प्रिंस आदि समेत तमाम बच्‍चे अपने ही घर के आसपास खुले पड़े बोरवेल में फंस चुके हैं। जबकि कुछ बच्चों की सांसें टूट गईं। यदि पिछले कुछ सालों की बोरवेल में बच्चों की गिरने की घटनाओं पर गौर करें तो कई नाम सामने आते हैं, लेकिन सभी की किस्मत प्रिंस जैसी नहीं रही।


कुरुक्षेत्र का प्रिंस
23 जुलाई 2006 की घटना थी। जब पांच साल का प्रिंस जन्‍मदिन के दिन अपने घर के पास खुले बोरवेल में 60 फीट नीचे तक गिर गया था। 40 घंटे बाद उसे निकाला जा सका था। इसका दुनियाभर में मीडिया ने लाइव कवरेज दिखाया था। इस घटना ने विभिन्न धर्म और समुदायों के लोगों ने प्रिंस को बचाने के लिए दुआएं की थीं। प्रिंस आज बड़ा हो गया है।

कटनी का अमित
4 फरवरी 2007 को मप्र के कटनी जिले में दो साल का अमित 55 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। 48 घंटे से बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका।

गुजरात की आरती
9 मार्च 2007 को गुजरात के करमाडिया में तीन साल की आरती बोरवेल में गिर गई थी, लेकिन उसे भी नहीं बचाया जा सका।

रायचुर का संदीप
अप्रैल 2007 में कर्नाटक के रायचुर में 60 फीट गहरे बोरवेल में गिरकर संदीप की मौत हो चुकी है।

गुजरात का सानू
7 अप्रैल 2007 को गुजरात के महसाना जिले में 5 वर्षीय सानू गिर गया था। सेना ने उसे बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन बोरवेल ही उसकी कब्र बन गई।

पुणे की गीता
17 जून 2007 में पुणे के श्रीरूर इलाके में पांच वर्षीय गीता भी बदकिस्मत थी, जिसकी बोरवेल में मौत हो गई थी।

अस्त हुआ जयपुर का सूरज
4 जुलाई 2007 जयपुर के निमादा गांव में 180 फीट गहरे बोरवेल में 6 साल का सूरज गिर गया था। 65 घंटे के प्रयास के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

आंध्र का कार्तिक
4 अगस्‍त 2007 आंध्र प्रदेश के गुडुर जिले के बोटाला गांव में 6 साल का कार्तिक 200 फीट गहरे बोरवेल में गिरा। उसकी भी मौत बोरवेल में हो गई थी।

राजस्थान की सारिका
7 अप्रैल 2007 की बीकानेर के अदसर गांव में दो साल की सारिका 155 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। 19 घंटे के ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित निकाला गया, लेकिन अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया।

गुजरात की किंजल
7 अप्रैल 2007 का दिन दो साल की किंजल मान सिंह के लिए काल बनकर आया। मदेली में किंजल भी बोरवेल के मुंह में समा गई।

आगरा की वंदना
25 मार्च 2008 में आगरा के टेहरा गांव में 160 फीट गहरे बोरवेल में तीन वर्षीय वंदना गिर गई थी।

गुड़गांव की माही
20 जून 2012 माही 68 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। 64 घंटों के प्रयास के बावजूद सेना उसे नहीं बचा सकी।

Published on:
18 Oct 2015 01:40 pm
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