
MP Employees Strike: मध्यप्रदेश में कई विभागों के कर्मचारी इन दिनों नाराज हैं। राजधानी भोपाल समेत कई शहरों की सफाई व्यवस्था चार दिन में ठप है, वहीं शुक्रवार से पानी सप्लाई भी बंद की जा रही है। इस बीच कल से दो दिनों के लिए प्रदेश के 45 हजार से अधिक बिजली कर्मचारी भी हड़ताल पर रहेंगे।
मध्यप्रदेश में शुक्रवार को कई शहरों की सफाई व्यवस्था बेपटरी हो जाने के बाद शुक्रवार को पानी सप्लाई भी बंद की जा रही है। नगर निगम के जलकार्य विभाग के कर्मचारियों ने भी सरकार के सामने अपनी मांगे रखी हैं। राजधानी समेत कई शहरों से खबरें आ रही हैं कि इन कर्मचारियों ने अपनी मांगें पूरी नहीं होने पर हड़ताल जारी करने का ऐलान किया है। भोपाल के 85 वार्डों में 18 हजार कर्मचारियों में से 15 हजार हड़ताल पर हैं। इनमें जल कार्य विभाग के कर्मचारी भी शामिल हो रहे हैं।
प्रदेश के कर्मचारियों का एक दल नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मिलने पहुंचा तो वे नहीं मिले और उन्होंने अधिकारियों को भेज दिया। इससे कर्मचारी और भड़क गए। नर्मदापुरम, विदिशा, राजगढ़, गुना, हटा, दमोह, बंडा, गढ़ाकोटा, रहली, राहतगढ़, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, खंडवा में हड़ताल का असर दिख रहा है। कचरा पेटियों में कचरा ओवरफ्ल हो रहा है। मजबूरन स्थानीय लोगों को कचरा जलाना पड़ रहा है, जिससे शहर में प्रदूषण बढ़ गया है। यहां एक्यूआई 200 के पार पहुंच गया है।
सफाई कर्मियों की मांग है कि उन्हें पूर्ण सरकारी कर्मचारी का दर्जा दें। सेवाकाल के दौरान पति या पत्नी की मृत्यु पर अनुकंपा नियुक्ति मिले। सभी कर्मचारियों का न्यूनतम मासिक वेतन 25,000 रुपए तय किया जाए।ठेका प्रथा समाप्त कर सभी सफाईकर्मियों को स्थायी किया जाए। कर्मचारियों से बातचीत लगातार चल रही है। कचरा कलेक्शन और शहर की सफाई व्यवस्था सुचारू रखने वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं। कर्मचारियों की मांगें निगम स्तर की नहीं हैं। यह सरकार के स्तर पर तय होना है। इस स्थिति से शासन को अवगत करा दिया गया है।
मध्यप्रदेश की 6 बिजली कंपनियों के 45 हजार कर्मचारियों का भी गुस्सा नजर आ रहा है। उन्होंने भी शनिवार और रविवार को काम बंद रखने की चेतावनी दे डाली। यदि यह कर्मचारी हड़ताल पर चले गए और किसी प्रकार के फॉल्ट होने पर शहर की बिजली चले गई तो सुधारने वाला कोई नहीं होगा। इन कर्मचारियों की 34 मांग हैं। इन कर्मचारियों को कहना है कि श्रम कानून में किए गए प्रावधानों के अनुसार अतिरिक्त पारिश्रमिक दिया जाए। ठेका प्रथा समाप्त करें। पंजाब की तरह आउटसोर्स कर्मचारी विधेयक लागू करें, ठेकेदारों के बजाय बिजली कंपनियों से सीधे वेतन मिले। सीनियरटी व योग्यता के अनुसार रिक्त पदों पर नियमित करें। वेतन बढ़ाने, जोखिम भत्ता और नाइट अलाउंस, मेडिकल लीव, एक जैसा बोनस और अवकाश नकदीकरण की भी मांग पूरी करने को कहा है।