हाइटेक कैमरे से होगी निगरानी, संवेदनशील स्थिति भांपते ही भेजेंगे अलर्ट...।
अब सूबे की जेलों को सुरक्षा के दृष्टीकोण और भी अधिक मजबूत बनाया जाएगा। अब प्रदेश की जेलों को आर्टिफिशिएल इंटेलीजेंस (ARTIFICIAL INTELLIGENCE) यानी एआई (AI) तकनीक से लैस किया जाएगा। जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। एआई तकनीक का उपयोग अब हर क्षेत्र में किया जा रहा है। लिहाजा, प्रदेश की जेलों में भी इस तकनीक का कैसे इस्तेमाल किया जाएगा। इसे लेकर जिला स्तर की समितियों से सुझाव मांगे गए हैं।
जेलों की स्थिति सुधारने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्देश दिए गए है। साथ ही कोर्ट की ओर से मुख्य सचिव से इसे लेकर शपथ-पत्र भी मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाल ही में निर्देश दिए गए हैं कि हर जिला स्तर पर एक 5 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जिसमें प्रधान जिला सत्र न्यायधीश, कलेक्टर, एसपी, जेल अधीक्षक और डालसा के सचिव मिलकर ये सुझाव देंगे कि कितनी जेलों में अतिरिक्त बैरक बनाई जाएगी।
दूसरा एआई के संबंध में सुझाव दिए जाएंगे कि जेलों में इसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है और जेलों की क्षमता को देखते हुए अतिरिक्त जेल के संबंध में भी सुझाव मांगा गया है। यानी कुल तीन बिंदुओं पर कमेटी की बैठक कर सुझाव मांगे गए है।
दरअसल जेलों में एआई युक्त कैमरों की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। जो सामान्य कैमरों से कहीं ज्यादा अलर्ट देते हैं। एआई युक्त कैमरे पल-पल की मूवमेंट को नोटिस तो करते ही हैं साथ ही संभावित खतरों पर जेल प्रशासन को अलर्ट मोड में भी लाते हैं। साथ ही इस तकनीक की मदद से बंदियों के संदिग्ध व्यवहार तक को पकड़ा जा सकता है। साथ ही फेस रिकग्निशन जैसी तकनीक की मदद से बंदियों की पूरी कुंडली दिनभर में पता कर सकेंगे।