
Bhopal news: सब कुछ ठीक रहा तो मप्र को जल्द ही 13 आइएएस और मिल जाएंगे। दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्मिक विभाग में सोमवार को इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक होनी है, जिसमें राज्य प्रशासनिक सेवा के 39 नामों पर विचार किया जाना है, इनमें वरिष्ठता क्रम में सबसे आगे अफसरों को आइएएस अवार्ड होना है लेकिन इन 13 में से 4 नामों पर अलग-अलग विवाद है। यदि डीपीसी में उक्त विवादों को आधार दिया जाता है तो सूची में नीचे के 9 अन्य नामों पर विचार होगा। इस तरह 13 में से आइएएस बनने वाली 9 महिला अफसर हो सकती हैं। बता दें कि हर साल वरिष्ठता के आधार पर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आइएएस अवॉर्ड होता है। यानी राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर कहलाते हैं। यह अहम ओहदा होता है
जीएडी के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों में जीएडी के उप सचिव जयेंद्र कुमार विजयवत, राज्य निर्वाचन आयोग में उप सचिव मनोज मालवीय, परिवहन विभाग के उप सचिव कमल चंद्र नागर, शहडोल जिले में अपर कलेक्टर मिनिषा पांडेय, भोपाल जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी, इंदौर संभाग में उपायुक्त (राजस्व) सपना एम लोवंशी, बुरहानपुर अपर कलेक्टर नीता राठौर, शाजापुर जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी, लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में उप सचिव रानी पासी, आयुष विभाग की उप सचिव रंजना देवड़ा, महिला एवं बाल विकास विभाग की उप सचिव माधवी नागेंद्र, पर्यावरण विभाग में उप सचिव एवं पीसीबी मप्र की प्रभारी सदस्य सचिव वर्षा सोलंकी व माध्यमिक शिक्षा मंडल में अतिरिक्त सचिव प्रियंका गोयल का नाम वरिष्ठता क्रम में सबसे आगे है लेकिन इन्हीं में से चार नाम ऐसे है, जिनके साथ विवाद जुड़ गए हैं।
डीपीसी के लिए जिन 39 नामों की सूची तैयार की है, उनमें महीप किशोर तेजस्वी का नाम भी शामिल है। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने तेजस्वी के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई है। उधर, सपना एम लोवंशी के नाम का आरटीआइ कार्यकर्ता अजय दुबे ने सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। हालांकि जीएडी को इन नामों पर आपत्ति है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है।
जिन 39 नामों की सूची प्रस्तावित की है, उनमें से सभी पर विचार होगा। विचार के बाद नामों को वरिष्ठता व संबंधितों की सीआर के आधार पर आउट स्टैंडिंग, वैरी गुड, गुड और अनफिट श्रेणी में रखा जाएगा। सबसे पहले आउट स्टैंडिंग श्रेणी में शामिल अफसरों को आइएएस अवॉर्ड होंगे, यदि कोटा बचता है तो वैरी गुड श्रेणी में शामिल नामों को लिया जाएगा, इसके बाद भी कोटा बचा तो गुड श्रेणी से नाम उठाए जाएंगे। केंद्रीय कार्मिक विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह पदोन्नति नहीं, बल्कि मैरिट कम अपॉइंटमेंट है, इसलिए जो नाम इस बार अनफिट श्रेणी में डाले जाएंगे, वे अगली बार उस श्रेणी से बाहर भी आ सकते हैं, क्योंकि हर बार बीते 5 साल की सीआर का अवलोकन किया जाता है।
जीएडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जिन चार नामों पर विवाद है, यदि डीपीसी में वे अटक जाते हैं तो वरिष्ठता के आधार पर हरदा जिला पंचायत सीईओ नरोत्तम प्रसाद भार्गव, मप्र लोक सेवा आयोग में अपर नियंत्रक निधि सिंह राजपूत, जीएडी (कार्मिक) में उप सचिव निमिषा जायसवाल व उज्जैन जिला पंचायत एवं उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप कुमार सोनी का नाम आगे बढ़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक इन चार नामों में से एक के लिए विशेष तौर पर जगह बनाए जाने की चर्चा सार्वजनिक हो चुकी है।