भोपाल

कुर्सी बचाने को छुआछूत का सहारा? प्रतिमा बागरी की दलील पर एमपी में मचा सियासी बवाल

Pratima Bagri Caste Certificate- मध्यप्रदेश की मंत्री प्रतिमा बागरी और उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर चर्चा तेज हो गई है...।
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Jul 17, 2026
mp minister pratima bagri
mp minister pratima bagri (फोटो एआई जनरेटेड)

MP Politics- मध्यप्रदेश के कुछ मंत्री कुर्सी बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने कुछ ऐसा ही किया। खुद को अनुसूचित जाति (एससी) का बताने के लिए छुआछूत जैसी कुप्रथा का सहारा लिया। उन्होंने दावा किया कि आज भी ब्राह्मण, ठाकुर व राजपूत जैसी ऊंची जातियों के कई लोग बागरी जाति से भेदभाव रखते हैं। वे बागरी जाति के घरों में भोजन तक नहीं करते। यह प्रमाणित करते हैं कि बागरी ठाकुर या राजपूत उप-जाति की नहीं हैं। वे एससी वर्ग से हैं।

मंत्री ने यह दावा जाति प्रमाण पत्र की जांच करने वाली उच्च स्तरीय (अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र) छानबीन समिति के सामने पेश किया। उन्होंने 110 साल पुराने दस्तावेज व 20 से अधिक कारण पेश किए। समिति ने इस आधार पर मंत्री को क्लीन चिट देते हुए एससी वर्ग का मान लिया। समिति ने कहा, नागौद के अनुविभागीय अधिकारी (प्रमाणीकरण) से 7 फरवरी 2004 को जारी एससी जाति प्रमाण पत्र वैध है। शिकायकर्ता कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के दावे को खारिज कर दिया। अहिरवार ने कहा, समिति के फैसले को कोर्ट में चुनौती देंगे।

हर हफ्ते ठाकुर-ब्राह्मण मंत्रियों के साथ बैठती हैं बागरी, फिर छुआछूत कैसे

मंत्री बागरी का छुआछूत वाला दावा कितना सही है, यह बड़ा सवाल है। बागरी सरकार का हिस्सा हैं। उन पर छुआछूत जैसी बुराइयों को खत्म करने का नैतिक जिम्मा है। वे हर मंगलवार कैबिनेट में सीएम समेत ठाकुर और ब्राह्मण जाति के कई मंत्रियों के साथ बैठती हैं। उनकी रैगांव विधानसभा के लोगों का कहना है, मंत्री शादी-विवाह और सुख-दुख में ठाकुर, ब्राह्मण जैसी कई जातियों के लोगों के घर भी जाती हैं।

प्रयागराज के पंडों से ली वंशावली पेश की

समिति के समक्ष प्रतिमा बागरी ने अपने पक्ष में वर्ष 2004 में जारी मूल हस्तलिखित एवं डिजिटल जाति प्रमाण पत्र, वंशावली, पूर्वजों से जुड़े राजस्व अभिलेख, विभिन्न शासकीय रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेज पेश किए। उन्होंने परदादा रामगोपाल बागरी के समय वर्ष 1916 से संबंधित राजस्व अभिलेख भी दिए। प्रयागराज के पंडों के पास मौजूद वंशावली अभिलेख भी दिया। समिति ने पहले सतना कलेक्टर, एसपी समेत कई स्तर पर जांच कराई। 1916 व उसके बाद के दस्तावेज जांचे। हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अध्ययन किया। आदिम जाति अनुसंधान संस्थान मप्र के अध्ययन का हवाला देते हुए माना, बागरी जाति का राजपूत जाति के साथ रोटीबेटी का रिश्ता नहीं है। भेदभाव से जुड़े कई अन्य बिंदुओं का भी जिक्र किया।

'मुझे फंसाया था'

मंत्री प्रतिमा बागरी ने दावा किया, मुझे कुछ लोगों ने फंसाया था। सबको पता है सतना जिले में बागरी समाज राजपूत वर्ग में कभी नहीं रहा। समिति ने दूध का दूध, पानी का पानी कर दिया।

'शासन ने बचाया'

शिकायतकर्ता अहिरवार ने कहा कि उन्होंने समिति को सभी दस्तावेज की प्रति दी थी। इसमें सरकार के जारी आदेशों की प्रतियां भी थीं। सरकार ने मंत्री बागरी को बचाया।

Updated on:
17 Jul 2026 10:34 am
Published on:
17 Jul 2026 10:34 am