MP News: मैहर के राम नगर में बिना मरम्मत के ही अफसर खा गए 4 करोड़, पत्रिका ने मामला किया उजागर तब जागा प्रशासन, 17 पर हुआ एक्शन, अब प्रदेश भर के स्कूलों की होगी जांच, अब नपेंगे भ्रष्टाचारी अफसर...
MP News: पत्रिका ने मैहर जिले की रामनगर ब्लॉक में 23 जनवरी से स्कूल में मरमत के नाम पर हुए घोटाले की परतें उधेड़ीं तो गूंज गुरुवार को विधानसभा तक पहुंची। मैहर के भाजपा विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी व कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने ध्यानाकर्षण के जरिए मामला उठाया। कहा, पत्रिका अखबार में प्रकाशित होने के बाद घोटाला सामने आया। भाजपा विधायक ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के संचालक, उप संचालक, संयुक्त संचालक स्तर के अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्हें सस्पेंड करने और हटाने की मांग की। शिक्षा मंत्री ने जांच की बात कही, पर विधायक नहीं माने। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, मंत्री तय करें कि कोई अफसर जांच को प्रभावित कर सकता है तो उन्हें हटाकर जांच कराएं। तब मंत्री उदय प्रताप सिंह ने संबंधित अफसरों को हटाकर पूरे प्रदेश में स्कूलों की जांच कराने की बात कही।
श्रीकांत चतुर्वेदी : प्रदेश के स्कूलों की मरम्मत और रखरखाव की आड़ में संगठित रूप से आर्थिक अपराध हो रहे हैं। मैदानी स्तर पर बिना काम हुए ही लोक शिक्षण संचालनालय के अफसर और ठेकेदार राशि का बंदरबांट कर रहे हैं।
इसमें ऊपरी स्तर से बड़ी अनियमितता हुई है। लोक शिक्षण संचालक, उप संचालक, संयुक्त संचालक भोपाल और विदिशा से अपने निजी ठेकेदार भेज रहे हैं। ऐसे भ्रष्ट अफसरों को सस्पेंड करना चाहिए।
उदय प्रताप: स्कूल शिक्षा मंत्री रामनगर में जो विसंगति सामने आई, उसमें 17 आरोपियों पर केस दर्ज कराया। जिन ठेकेदारों ने फर्जी बिल लगाए, उन पर भी कार्रवाई होगी।
कांग्रेस विधायक घनघोरिया ने कहा, रामनगर की यह घटना 'पत्रिका' अखबार में प्रकाशित हुई, तब मामला खुला, एफआईआर हुई। नहीं तो दबा ही रहता। लेकिन लोक शिक्षण में वर्षों से एक ही जगह पर बैठे लोगों ने कॉकस बना लिया। संचालक, उप-संचालक, संयुक्त संचालक सीधे प्रस्ताव मंगाते हैं। बिना टेंडर काम होता है। रामनगर में मामला पकड़ में आया, पर समस्या पूरे प्रदेश की है। जहां लोक शिक्षण के कार्य हुए, उनके 3 साल के रिकार्ड की जांच हो। ऐसी नीति बनाएं कि बंदरबांट न हो। जब मंत्री गड़बड़ी मान रहे हैं तो अफसरों को हटा क्यों नहीं रहे?
पत्रिका ने रामनगर में स्कूल मरम्मत में घोटाले का खुलासा किया। 23 जनवरी को 2 करोड़ रुपए का घोटाला उजागर किया। कलेक्टर ने खबर पर संज्ञान लेकर बीईओ के निलंबन का प्रस्ताव कमिश्नर को भेजा। एसडीएम की अध्यक्षता में जांच कराई तो घोटाला चार करोड़ से ज्यादा का निकला। तब बीईओ समेत 17 प्रचार्य व एक चपरासी को सस्पेंड किया गया। सभी पर एफआइआर कराई। ठेकेदारों पर भी एफआइआर हुई।