भोपाल

20 हजार घरों के लिए जा रहीं बीमारी वाली सब्जियां, कॉलोनियों के सीवेज से पनप रहे खेत

MP News: 600 एकड़ में खेती, ताजी सब्जी पॉश इलाकों की गंदगी से लथपथ, खुद किसान परिवार भी खा रहे और हजारों परिवारों को भी खिला रहे... भोपाल में सीवेज खेती का पर्दाफाश करती संवाददाता शिवाशीष तिवारी की रिपोर्ट...

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Feb 14, 2026
Sewage farming in bhopal patrika ground report(photo:patrika creative)

MP News: बावड़ियां कलां का नाला आज खेती का पर्याय बन गया है, मगर यह खेती विभत्स और खतरनाक सच्चाई उजागर करती है। भोपाल के 20 हजार से अधिक घरों का गंदा सीवेज सीधे इस नाले में गिरता है और इसी गंदगी से करीब 600 एकड़ में फसलें उगाई जा रही हैं। इनमें 400 एकड़ में सिर्फ सब्जियां हैं, जिन्हें 380 परिवार उगाते हैं और यही परिवार इस जहरीले उत्पाद को खुद भी खा रहे हैं। नाले के किनारे करीब 240 बिजली और डीजल पंप की फौज चौबीसों घंटे सीवेज उलीच रहे हैं। यहां उगी हरी सब्जी देखकर कोई भी इन्हें खरीदना व खाना चाहेगा। लेकिन खेत, जड़, पौधा और फल आदि सब में जहर है। 13 नालियों का एक नाला चार किमी लंबा यह नाला मौत का जाल बुन रहा है।

यहां आकृति इको सिटी, पल्लवी नगर, रघुनाथ नगर, सलैया, बावडिय़ा कलां गांव, रोहित नगर और गुलमोहर कॉलोनी के घरों का मल-मूत्र, केमिकल और प्लास्टिक कचरा बहता है। करीब 13 छोटी-बड़ी नालियां इस मुख्य नाले में मिलती हैं। नाले में प्राकृतिक जल नहीं आ रहा। अब यह सीवेज के सहारे बह रहा और किसानों के लिए जीवनरेखा बन गया है।

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केस 1:

रेलवे पटरी के पास मौत की बुवाई रेलवे पटरी के बाजू में बने मंदिर के पास बीच नाले में रखे पंप से सात एकड़ क्षेत्र की सिंचाई हो रही है। किसान ने बताया कि उन्होंने धनिया, टमाटर और चना समेत 13 फसलें बोई हैं। बारिश में जब नाला उफान पर होता है, तब खेती रुकती है, वरना बाकी समय यह सीवेज ही इनकी फसलों की लाइफलाइन है।

केस 2:

एसटीपी के बगल में सीवेज का खेल रेलवे पटरी से सटे खेतों में जहां सरकारी एसटीपी लगा है, वहां भी स्थिति नहीं बदली। भूमि स्वामी तरुण सेहरावत के बोर्ड के आसपास चार एकड़ में अनाज और सब्जियां लहलहा रही हैं। किसान ने सड़क के नीचे कंक्रीट पाइप डालकर नाले के पानी को खेत के गड्ढे तक पहुंचाया है, जहां से डीजल पंप जहर को फसलों की रगों में पहुंचा रहा है।

केस 3:

बीडीए निर्माण के पास की स्थित बीडीए निर्माण क्षेत्र, बावडिय़ा गांव और रेलवे पटरी के बीच के खेतों की कहानी और भी गंदी है। यहां घरों से निकलने वाले सीवेज की नाली को मिट्टी की मेढ़ बनाकर गड्ढों में रोका जाता है। इसी जमे हुए कचरे और झाग वाले पानी से भाजियां, सब्जियां और फसलें उगाई जा रही हैं, जो अगले दिन कॉलोनियों की गलियों व मंडियों से आपके घरों तक पहुंचती हैं।

MP news Sewage Farming Facts Patrika Ground report(photo:patrika)

एक्सपर्ट व्यू: ऐसे खाद्यान्नों से बीमारी

1. सीवेज में हैवी मेटल, ई- कोली और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया होते हैं। इन फसलों के सेवन से टाइफाइड, डायरिया और लंबी अवधि में किडनी-लिवर रोग हो सकते हैं। यह धीमा जहर है।

-डॉ. पूर्वा गोहिया, जीएमसी भोपाल

2. यह स्थिति शहरी नियोजन की विफलता है। नाले पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं, खेतों की ङ्क्षसचाई का नहीं। एसटीपी का पानी बिना ट्रीटमेंट के खेती में उपयोग हो रहा है, यह कानूनन अपराध है।

- राकेश दीवान, पर्यावरणविद्

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Updated on:
14 Feb 2026 03:18 pm
Published on:
14 Feb 2026 03:17 pm
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