mp news: जैन मति धर्म शाला में वात्सल्यमयी आत्म आराधना शिविर का आयोजन, विशेष सत्र में देश के ख्यातिलब्ध बाल ब्रह्मचारी विद्वान सुमत प्रकाश (खतौली) ने जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों पर डाला प्रकाश।
mp news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के गुजरपुरा स्थित जैन मति धर्म शाला में आयोजित 'वात्सल्यमयी आत्म आराधना शिविर' के दौरान अध्यात्म की अविरल धारा बह रही है। शिविर के विशेष सत्र में देश के ख्यातिलब्ध बाल ब्रह्मचारी विद्वान सुमत प्रकाश (खतौली) ने जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए मुमुक्षु समाज को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने ओजस्वी संबोधन में आत्मा की अमरता और दर्शन की महत्ता पर विशेष बल दिया।
कायर्क्रम में मौजूद भक्तों को संबोधित करते हुए सुमत भैया ने कहा कि मनुष्य को अपने मूल स्वभाव को पहचानने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया, मैं अनादि काल से आत्मा हूं और अनंत काल तक आत्मा ही रहूंगा। बदलने वाली वस्तु केवल पर्याय (अवस्था) है, मूल द्रव्य नहीं। उन्होंने आगे कहा कि जिस जीव की दृष्टि अपने भीतर विराजमान 'भगवान आत्मा' पर टिक जाती है और जिसकी श्रद्धा स्व-कल्याण में लीन हो जाती है, संसार की कोई भी बाहरी शक्ति उसका अहित नहीं कर सकती। दुःख का कारण आत्म-विस्मृति है, और सुख का मार्ग आत्म-बोध से होकर गुजरता है। इस दौरान उन्होंने तत्व चर्चा के माध्यम से उपस्थित धर्मावलंबियों की शंकाओं का समाधान भी किया।
मुमुक्षु मंडल के अध्यक्ष अशोक जैन और मंत्री देवेंद्र बड़कुल ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि विद्वान सुमत प्रकाश जी आगामी 21 अप्रेल तक भोपाल प्रवास पर रहेंगे। उनके सानिध्य में राजधानी के जैन समाज को अध्यात्म के विभिन्न आयामों को समझने का दुर्लभ अवसर मिल रहा है।
गुरुदेव कानजी स्वामी की जन्म जयंती पर आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता गुरुदेव के सिद्धांतों पर विशेष व्याख्यान आयोजित होंगे। इसके साथ ही अक्षय तृतीया पर्व पर दान और तप के इस महापर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
शिविर के इस विशेष सत्र में समाज के वरिष्ठ जनों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से कस्तूर चन्द्र जैन, मनोज आरएम उमेश जैन, प्रदीप सोगानी, मोहित बड़कुल, विनीत जैन और मनीष जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। मुमुक्षु मंडल के प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वयं के स्वरूप को पहचानना और जैन दर्शन के अनुसार सम्यक दर्शन की प्राप्ति की ओर अग्रसर होना है। प्रतिदिन सुबह और शाम होने वाली इन कक्षाओं में भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों से मुमुक्षु भाई-बहन धर्म लाभ ले रहे हैं।