
mp rural hospitals:प्रदेश में अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी फिजियोथेरेपी यूनिट शुरु करने की तैयारी चल रही है। अभी जिला अस्पतालों और कुछ सिविल अस्पतालों में यह यूनिट चल रही है। स्वास्थ्य विभाग ने कुछ जिलों के सीएचसी में इस यूनिट के निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी फिजियोथेरेपी के लिए जिला अस्पताल या निजी संस्थानों में नहीं जाना पड़ेगा। दौड़-भाग भरे जीवन के बीच फिजियोथेरेपी की महत्त्वता बढ़ी है। ग्रामीण अस्पतालों में थेरेपी सेंटर खुलने से अब ऐसे मरीजों को भी लाभ मिलेगा जिन्हें अब तक बड़े सेंटर पर निर्भर होना पड़ता था।
एनएचएम ने कुछ जिलों के सामुदायिक अस्पतालों के लिए टेंडर जारी किए हैं। इनमें मंडला के बाम्हनी, नारायणगंज, बंजर, सिवनी के धनौरा, घनसोर, डिंडोरी के बजाग, अमरपुर, कटनी के बहोरीबंद में फिजियोथेरेपी यूनिट (physiotherapy unit) की स्थापना की प्रक्रिया शुरु कर दी है। इसके पहले खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, धार के लिए भी यह प्रक्रिया हो चुकी है। अगले दो माह में फिजियोथेरेपी यूनिट बनाने की योजना है। इसके साथ फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्तियां भी की जाएंगी। एनएचएम द्वारा संविदा पर नियुक्तियां की जाएंगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार फिजियोथेरेपी यूनिट में आधुनिक उपकरण भी लगाए जाएंगे। इससे मरीजों को पूरी सुविधा मिलेगी। अस्पतालों की फिजियोथेरेपी यूनिट में डायथर्मी, टीएफटी, अल्ट्रासोनिक मसाज, पाश्चुरल मिरर विथ व्हील, हाथ के अभ्यास का पूरा सेट, रोलिंग वाकर, एडल्ट स्टैंडिंग फ्रेम कोहनी और हार्ड सपोर्ट के साथ, वबल कुशन, फिजियो गन, व्हील चेयर (फोल्डेबल), फिजियोथेरेपी वाइब्रेटर, रोइंग मशीन आदि उपकरणों की व्यवस्था की जाएगी। एनएचएम ने इन उपकरणों की खरीदी को लेकर कई जिलों में टेंडर प्रक्रिया भी शुरु कर दी है।
फिजियोथेरेपी जटिल सर्जरी, हड्डियों की टूटफूट जैसे खिलाड़ियों को आने वाली चोटों तथा मांस-पेशियों जोडों एवं न्यूरो तंत्र से संबंधित समस्याओं, बीमारियों, चोटों के इलाज में फिजियोथेरेपी काफी कारगर है। आजकल इसका प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। जॉइंट रिप्लेसमेंट के बाद भी डॉक्टर फिजियोथेरेपी कराते हैं। अभी तक थेरेपी के लिए दूरांचल गांव के लोगों को बड़े शहरों में जाना पड़ता था। अब उन्हें क्षेत्र में ही सुविधा मिल सकेगी।