MP Startup Summit 2026: रवीन्द्र भवन में आयोजित मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट 2026 में युवाओं के इनोवेशन ने सबको चौंका दिया। कहीं बिना खून शुगर जांच हुई, तो कहीं देसी भाषाओं में कोडिंग और मजदूरों-किसानों की समस्याओं के स्मार्ट समाधान सामने आए।
MP Startup Summit 2026: भोपाल के रवीन्द्र भवन में मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट 2026 का आयोजन में किसी ने मजदूरों को उनका हक दिलाने के लिए मोबाइल एप्लीकेशन बनाई, तो किसी ने आंखों की जांच के लिए अनोखा चश्मा बनाया, तो किसी ने कोडिंग की हिन्दी-गुजराती में किट तैयार की। ऐसे ही अनोखे प्रोजेक्ट देखने को मिले मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट मिले। युवाओं ने हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए तैयार किये गये अपने इनोवेटिव प्रोजेक्टें प्रस्तुत किये।
बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन की छात्र मुस्कान खरे और सुमित शर्मा ने बताया कि उन्होंने एक हेल्थ मॉनिटरिंग डिवाइस विकसित की है, जिसके लिए उन्हें बिल्ड-इट कैटेगरी में प्रथम पुरस्कार मिला। यह डिवाइस बिना खून निकाले केवल उंगली रखने से ग्लूकोज, ब्लड शुगर, हार्ट रेट ऑक्सीजन लेवल और बॉडी टेम्परेचर माप सकती है। वे इसे पूरे भारत में लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।
बायोटेक्नोलॉजी से पीएचडी डॉ पूजा दुबे पांडेय ने बताया कि उन्होंने किसानों द्वारा पराली जलाने से हो रहे प्रदूषण को देखते हुए टिश्यू कल्चर लैब शुरू की। इसमें पराली से मशरूम के बीज (स्पॉन) तैयार किए जाते हैं, जिन्हें बिना मिट्टी के उगाया जा सकता है। मशरूम पोषण का अच्छा स्रोत है और सुखाने पर इसमें विटामिन-डी की मात्रा बढ़ जाती है।
वैभव नागोरी ने अंग्रेजी न आने के कारण ग्रामीण बच्चों को कोडिंग सीखने में होने वाली कठिनाई को दूर करने हिंदी, गुजराती, मराठी और अंग्रेजी में कोडिंग सिखाने वाली किट विकसित की है। यह किट पाइथन, सी++ जैसी भाषाएं सिखाने में सक्षम है। फिलहाल यह डिवाइस नागपुर के सरकारी स्कूलों में उपयोग हो रही है।
अरविंद कुमार पांडे और चंदन सोनी ने मजदूरों को उनके काम के सही घंटे और मेहनताना न मिल पाने की समस्या को देखते हुए मोबाइल एप बनाया है। इससे काम का समय, स्थान और भुगतान की सही और पूरी जानकारी ले सकते हैं।
डॉ. निलय शर्मा को शिप-इट कैटेगरी में प्रथम पुरस्कार मिला है। वे बायोडिग्रेडेबल प्रोडक्ट तैयार करती हैं, जो सरसों, गेहूं धान की पराली और गन्ने के बगास से बनाए जाते हैं। डॉ निलय ने बताया कि उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल हैं और आसानी से नष्ट हो जाते हैं।
वेदांत डिंगरा ने बताया कि उन्होंने आखों की एक जांच किट बनाई है, जिससे आंगनबाड़ी. स्वास्थ्य संस्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में आंखों की जांच आसानी से की जा सकती है। यह किट कलर विजन, नियर विजन और डिस्टेंस विजन की जांच करती है और बिना इंटरनेट के मोबाइल एप के माध्यम से काम करती है। फिलहाल यह बिहार, राजस्थान व ओडिशा में अधिक उपयोग हो रही है।
राहुल रायने ने एक मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किया है। उन्हें कोड-इट कैटेगरी में प्रथम पुरस्कार मिला। इस एप के माध्यम से स्टेशनरी, ग्रोसरी, कॉस्मेटिक्स और यूनिफॉर्म जैसी वस्तुएं मंगाई जा सकती हैं। इसके जरिए प्रदेश के एमएसएमई, लघु व कुटीर उद्योग अपने उत्पादों बेच सकते हैं।