अभिनयन में हुआ नाटक 'नन्दू नचैया' का प्रदर्शन हुआ
भोपाल। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नवीन रंगप्रयोगों के प्रदर्शन की साप्ताहिक श्रृंखला 'अभिनयन' में आज विजय सोनवने के निर्देशन में नाटक 'नन्दू नचैया' का मंचन संग्रहालय सभागार में हुआ। मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड एक निचली जाति जो कि अपनी लोक नाट्य शैली से पहले प्रसिद्ध थी जिसे रवाला कहा जाता है। नन्दू नचैया इसी शैली से प्रभावित है जिसे उसने अपने अन्दर आत्मसात किया।
उसका नाच देखकर लोग बहुत पसंद करते है, उसे अपनी जाति से बड़ी जाति में कला दिखाने का मौका मिलता है। ठाकुर साहब के यहां जब वो अपनी कला दिखाता है तो ठाकुर की बहन (रूपा) को नन्दू और उसकी कला से प्रेम हो जाता है। जब यह बात ठाकुर को पता चलती है तो वह अपनी बहन को हवेली से निकाल देता है।
रूपा नन्दू से विवाह कर लेती है जब यह बात शैतान सिंह ठाकुर की हवेली का एक आदमी को पसंद नहीं आती क्योंकि वह रूपा से शादी करना चाहता था। इसलिए वह नन्दू को मार देता है। रूपा अपने पेट में पलने वाले नन्दू के बच्चे को एक बड़ा कलाकार बनाने का संदेश देती है।