नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक से होगी पहल, 50 हजार हेक्टेयर तक पहुंचेगा पानी,जल संसाधन विभाग बांग्लादेश की तर्ज पर कर रहा प्रयोग।
भोपाल। पानी की बर्बादी रोकने व सिंचाई शुल्क की अग्रिम वसूली के लिए सरकार प्री पेड वाउचर के जरिए नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। पहले चरण में इसकी शुरुआत नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक परियोजना से किए जाने का प्रस्ताव है।
प्रयोग सफल रहा तो नर्मदा के साथ ही अन्य नदियों में बने बांधों में भी ऐसा ही सिस्टम विकसित किया जाएगा। जितना पैसा उतना पानी पर आधारित यह आइडिया सरकार ने बांग्लादेश से लिया है। दरअसल तीन साल पहले जल संसाधन विभाग का एक दल बांग्लादेश के भ्रमण पर गया था। वहां सिंचाई नहरों में प्री पेड वाउचर से चलने वाली मशीन का अध्ययन किया था।
कार्ड से चलेगी मशीन
सरकार सिंचाई आच्छादित क्षेत्र में आने वाले किसानों को सिम कार्ड मुहैया कराएगी, जिसे रिचार्ज करने के लिए प्री पेड वाउचर किसान को लेना होगा। इसके साथ ही हर खेत के प्रथम छोर पर मशीन लगाई जाएगी, जो सीधे नहर से जुड़ेगी। मोबाइल की तर्ज पर कार्य करने वाली यह मशीन कार्ड लगाते ही चालू हो जाएगी। उससे सिंचाई के लिए पानी तभी तक मिलता रहेगा, जब तक उसमें बैलेंस होगा। इसके बाद नए रिचार्ज पर ही मशीन चालू हो पाएगी।
किसानों को मिलेंगे स्प्रिंकलर
इस प्रस्ताव की पुष्टि करते हुए संयुक्त संचालक आदिल खान ने बताया कि इस पहल से पानी कीे बर्बादी रुकेगी। इसीलिए सिम कार्ड और मशीन के साथ ही किसानों को स्प्रिंकलर भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि खेत के उस हर हिस्से तक पानी पहुंच सके, जहां सिंचाई की आवश्यकता है।
बड़े पैमाने पर बचा सकेंगे जल :
- सिंचाई के लिए विभाग का तर्क है कि बड़े पैमाने पर व्यर्थ बह जाने वाले पानी को बचाया जा सकेगा।
- किसान एक बार नहर से पानी खोले जाने के बाद निगरानी नहीं करते, जिससे अनावश्यक रूप से खेत में पानी एकत्रित हो जाता है। अब ऐसा नहीं होगा।
- अतिरिक्त पानी के कारण दलदली क्षेत्र बनने से रोकने में मदद मिलेगी और फसलें भी खराब नहीं होंगी।
-पानी की बचत होने से अतिरिक्त सिंचाई क्षेत्र विकसित करने में मदद मिलेगी।
- पानी के शुल्क को लेकर होने वाले बवाल पर रोक लगेगी और विभाग को सहज तरीके से राजस्व मिल सकेगा।
- किसान नहर खोलने के लिए विभाग के अमले के इंतजार में नहीं रहेंगे, बल्कि जब जरूरत होगी वे कार्ड लगाकर मशीन को चालू कर सकेंगे।
इधर, मेधा बोलीं- नर्मदा को भी खत्म करना चाहती है सरकार:
एक तरफ नर्मदा नाले में परिवर्तित हो गई है, तो दूसरी ओर समुंदर के मिलने से पहले ही समुंदर बनकर खारी हो गई है। गुजरात प्रदेश में नर्मदा नाम मात्र की बची है। सरकार मप्र में बची नर्मदा को भी खत्म करने के लिए खड़ी हो गई है। यह बात मेधा पाटकर ने नीलम पार्क में शुक्रवार को आयोजित नर्मदा बचाओ आंदोलन की सभा को संबोधित करते हुए कहीं।
यहां नर्मदा घाटी से विस्थापित किसान, मजदूर, मछुवारे, नाविक आदि मौजूद थे। पाटकर ने सरदार सरोवर बांध को केंद्र में रखते हुए कहा, बांध बनने के पूर्व ग्रामीणों को किसी अन्य क्षेत्र में विस्थापित करना था, लेकिन आज तक एक भी किसान को रहने की जगह नहीं दी गई।
नेता को दिया ठेका :
सूचना के अधिकार के माध्यम से हमें जानकारी मिली है कि बांध को बनने निकाले टेंडर सर्वाधिक बीजेपी नेता, ठेकेदारों को ही मिले हैं। जिस तरह व्यापमं घोटाला हुआ उसी तरह नर्मदा घाटी में भी करोड़ों का घोटाला हुआ है। किसानों की सुविधाओं को बढ़ाने का वादा करने वाले लोग नर्मदा का पानी बेचकर करोड़ों कमा रहे है और किसान एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।